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इन्वेस्टर्स समिट नहीं एंटरटेनमेंट समिट थी : विजया पाठक

भोपाल /  हाल ही में प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मैग्नीफिसेंट एमपी समिट 2019 आयोजन हुआ। समिट में करीब 900 उद्योगपति शामिल हुए, जिनकी सुरक्षा के लिए 800 पुलिस जवानों को तैनात किया गया। आयोजन स्थल ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर के मुख्य हॉल में करीब 1100 के लोगों की ही बैठक व्यवस्था की गई, जिसमें उद्योगपति, जनप्रतिनिधि, आयोजक, अधिकारी और मीडिया शामिल थी। 12 वीवीआईपी के लिए चार्टर प्लेन की व्यवस्था की गई। हम कह सकते हैं कि यह इन्वेस्टर्स समिट नहीं एंटरटेनमेंट समिट थी। एंटरटेनमेंट के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। इसके अलावा मेहमानों की और भी सुख-सुविधाओं के इंतजाम किए थे। सारे इंतजाम वीवीआईपी थे। कुल मिलाकर इस आयोजन में मध्यप्रदेश सरकार ने उद्योगपतियों के लिए पलक पावड़े बिछा दिए। आंकड़ों में बताया गया है कि इस समिट में उद्योगपतियों के साथ सरकार ने लगभग 74 हजार करोड़ के एमओयू साइन किए हैं। इस आयोजन में सरकार ने करोड़ों रूपये खर्च किए। दूसरी ओर सरकार के पास किसानों को मुआवजा देने के लिए पैसे नही होने का रोना रोया जाता है। विकास कार्यों के लिए फंड की कमी बताई जा रही है। फिर सवाल उठता है कि इतने भव्य आयोजन के लिए फंड कहा से आया और सबसे बड़ी बात इस मैग्नीफिसेंट एमपी समिट से सरकार को क्या हासिल हुआ। पहले भी जब-जब प्रदेश में इन्वेस्टर्स समिट आयोजित हुईं कांग्रेस ने फिजूलखर्ची के कई तरह के आरोप लगाए। अब कमलनाथ सरकार ने भी वही किया जिसका विरोध करती आयी है।
क्या सीएम कमलनाथ ने अपने उद्योगपति मित्रों को एंटरटेनमेंट करने के लिए प्रदेश में बुलाया था। क्या खुद उद्योगपति होने का परिचय दिया है। इन्वेस्टर्स समिट का इतिहास रहा है कि धरातल पर कुछ और होता है और आंकड़ों में कुछ और होता है। लेकिन कमलनाथ सरकार भी उसी ढर्रे पर निकल पड़ी है, जिस ढर्रे पर पुरानी सरकारें चलीं थीं।
कुल मिलाकर यह समिट कमलनाथ की ब्रांडिंग भर थी क्योंकि पूरे आयोजन में सीएम कमलनाथ से जुड़े कार्यक्रम थे। यहां तक कि सरकार के सहयोगी मंत्रियों को भी लूपलाईन में रखा गया। शुभारंभ से लेकर समापन तक कमलनाथ की ही ब्रांडिंग होती रही। कमलनाथ ने भी अपने आप को प्रदेश के माध्यम से स्वयं की ब्रांडिंग करने में कोर कसर नही छोड़ी।