शासन- प्रशासन ही नही क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों व मंत्रियों ने खेला इन ग्रामीणों के भावनाओं से......भूखमरी - बेरोजगारी एवं प्रदूषण से जूझते रसमड़ावासी !

WEE NEWS दुर्ग । जिला मुख्यालय दुर्ग से लगे ग्राम रसमड़ा के निवासी बेरोजगारी से त्रस्त भूखमरी के कगार पर है। इन्हें रोजी- रोटी तो नहीं मिल पा रहा लेकिन मुफ्त में कोयला, डस्ट,धूल से भरा प्रदूषित जीवन सहज सुलभ है। बर्षो से पीड़ित इन नागरिकों के साथ जनप्रतिनिधी , मजदूर यूनियन नेता,मंत्री इनके भावनाओं से खिलवाड़ करते आ रहे हैं। इनकी घावो पर हर किसी ने नमक का मरहम लगाया....। इस क्षेत्र से निर्वाचित होने वाले भाजपा-  कांग्रेस के विधायक लगातार मंत्री पद को सुशोभित करते रहे। कर भी रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य हैं कि सभी ने रसमड़ा वासियो के भावनाओ से खेलते रहे । लगभग एक माह पूर्व ग्रामिणो ने एकबार पुनः प्रशासन से अपनी समस्याओ का समाधान करने का अनुरोध किया ... । प्रशासन में बैठे अतिरिक्त जिलाधीश  पन्ना नूपुर ने सभी समस्या को गंभीरता से लेते हुए एक सप्ताह के अंदर रोजगार उपलब्ध कराने, प्रदूषण मिटाने का आश्वासन दिया। ताबड़तोड़ ग्रामीणों के सामने संबंधित अधिकारियों को तलब किया । गाँव के भोले भाले नागरिको ने आंदोलन वापस ले लिया । दो सप्ताह बाद एडीएम  ने ग्रामीणों  को मुख्यमंत्री जी से सम्पर्क करने का सलाह देकर समस्या के निदान करने में असमर्थता जाहिर कर दिए ! जो बेबस ग्रामीणो के साथ यह  क्रूर मजाक है । ग्रामीणों को अपनी समस्या के लिए मुख्यमंत्री के पास गुहार लगाना पड़े , फिर प्रशासन , विधायक मंत्री की भूमिका किसलिए है-? ग्रामीण इस संबंध मे क्षेत्रीय विधायक व केबिनेट मंत्री के पास भी अर्जी लेकर गये ! एक सप्ताह का आश्वासन मंत्री जी ने दिया है। रसमड़ा मे आम नागरिको मे चर्चा का विषय है कि ताबड़तोड कार्यवाही करने वाले एडीएम आखिर किनके दबाव में  समस्या के समाधान से मुँह मोड़ लिए !ओर सीधे मुख्यमन्त्री जी से मिलने की सलाह देते दिखे । आखिर वह कॊन व्यक्ति है जो ग्रामीणों को बेरोजगारी ओर भूखमरी के बीच रखकर अपनी रोटी सेक रहा है। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियो ऒर अधिकारियों से निवेदन किया हैं एक रात रसमड़ा मे रहकर देखे ....। जनपद सदस्य अजय वैष्णव, किसान मोर्चा नंदकुमार निर्मलकर ने बताया कि प्रशासन के रैवय्ये से अब ग्राम वासी *करो या मरो* की नारा ऒर जज्बात को एक बार पुनः आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों का मानना हैं कि बेरोजगारी ओर भूखमरी , प्रदूषित वातावरण से मरने से अच्छा प्रशासन के जेल में ही मरे....।
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