मोहन मरकाम, विधायक कोण्डागांव का राजनीतिक सफर नामा देखिए WEE NEWS की खास रिपोर्ट

WEE NEWS कोंडागांव।  मोहन मरकाम का जन्म शाला दाखिला पंजी के अनुसार 15 सितंबर 1967 को ग्राम टेड़मुण्डा पोस्ट बवई, तहसील माकड़ी जिला कोण्डागांव में हुआ था । (वास्तविक जन्म माह अक्टुबर धान कटाई के समय वर्ष 1972 माता-पिता के बताए अनुसार)
इनके पिता का नाम स्व. भीखराय मरकाम जिनके आय का मुख्य साधन कृषि था । 7 भाई व 2 बहनों में मरकाम जी 5 वीं सन्तान थे । इनकी प्राथमिकी शिक्षा ग्राम टेड़मुण्डा में ही हुई, जहां शाला भवन न होने से झोपड़ी नुमा शाला में ही विद्या अध्ययन किया । माध्यमिक शिक्षा 7 किमी दुर घने जंगलों से पैदल रास्ता तय कर माध्यमिक शाला काटागांव से पूरी । हाई स्कूल व हायर सेकेण्डरी माकड़ी गांव से लगभग 20 किमी हाईस्कूल व हायर सेकेण्डरी स्कुल माकड़ी में पढ़ाई के आवागमन के साधन उपलब्ध नही होने के कारण पैदल जाना पड़ता था, कुछ समय छात्रावास में दाखिला लेकर पढ़ाई अनवरत जारी रखा व काॅलेज की पढ़ाई कांकेर महाविद्यालय से भूगोल विषय से एम.ए की शिक्षा प्राप्त की । इनकी रूचि कानून की पढाई में भी रही इसके लिए इन्होंने जगदलपुर में रहकर 2 वर्षों तक कानून की पढाई की । इस बीच शासकीय नौकरी मिलने से कानून की पढ़ाई बीच में ही छुट गई । 
मोहन मरकाम छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे । छात्र संघ के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारियों का निवर्हन किया । छात्र राजनीति में सक्रिय होने के कारण समस्याओं के निराकरण के लिए हमेशा तत्पर रहे । एनसीसी सी सर्टिफिकेट बी ग्रेड में पास की व सीनियर अंडर अफसर रहे व गणतंत्र दिवस, नई दिल्ली की परेड में चयनित होकर शामिल हुए । एनसीसी ने अनुशासन एकता भाईचारा सिखाया । आज उसी का परिणाम है, व्यक्तिगत जीवन में भी उसका पालन कर रहे हैं । समय के अनुसार चलना इनकी पहली प्राथमिकता है या यह कह सकते हैं समय के पाबंध हैं । 
इसके बाद वर्ष 1990-91 में शहीद महेन्द्र कर्मा जी के सानिध्य में कांग्रेस पार्टी से जुड़ने के बाद वर्ष 1993, 1998, 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी से टिकट की दावेदारी भी की लेकिन टिकट नही मिला, बावजूद इसके वे कांग्रेस पार्टी के प्रति वफादारी निभाते हुए कार्य करते रहे और कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को जिताने में जी जान से जुड़े रहे । साथ ही पार्टी द्वारा आयोजित कार्यक्रमों को सफल बनाने व जन जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहे । 
इसके बाद विधानसभा चुनाव 2008 में कांग्रेस पार्टी ने पहली बार मोहन मरकाम को अपना प्रत्याशी बनाया और भाजपा प्रत्याशी व छत्तीसगढ़ शासन में मंत्री (सुश्री लता उसेण्डी) से उनका सीधा मुकाबला रहा जिसमें उन्हे 2771 मतों से हार का सामना करना पड़ा । हार के दुसरे दिन से जनता के बीच निकलकर जनता के साथ पार्टी सतत् सम्पक बनाकर पांच वर्ष अपने क्षेत्र में लगातार मेहनत किया । उसके बाद फिर से 2013 में कांग्रेस ने मोहन मरकाम को टिकट दिया और इस बार वे भाजपा प्रत्याशी व छत्तीसगढ़ शासन में लगातार 10 वर्षों से मंत्री रही लता उसेंडी को शिकस्त दे दी । 
इसी प्रकार 2018 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी की ओर से लड़ते हुए फिर से भाजपा प्रत्याशी को हराया और लगातार दूसरी बार विधायक बने । चतुर्थ विधानसभा सत्र 2013 से 2018 के लिए उन्हे विधानसभा में उत्कृष्ट विधायक का सम्मान भी दिया गया । 
विधानसभा चुनावों के अलावा नगर पालिका चुनावों में भी मोहन मरकाम ने अपनी उपयोगिता साबित की 2014 में उनके नेतृत्व में कोण्डांगाव नगर पालिका का चुनाव संपन्न हुआ जिसमें नगरपालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित पार्टी ने 22 में से 16 वार्डों में जीत हासिल की । इसी प्रकार 2015 में जिला पंचायत के चुनाव में भी उनकी भूमिका सराहनीय रही जिसमें जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित 12 में से 9 सदस्यों ने जीत हासिल की । वहीं कोण्डागांव विधानसभा क्षेत्र में अधिकतर पंच व सरपंचों ने पार्टी के बैनर तले जीत हासिल की । 

लोकसभा चुनाव 2019 में उन्होने कांग्रेस प्रत्याशी के लिए जी तोड़ मेहनत की और प्रचंड मोदी लहर के बाद भी कोण्डागांव विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी को 12890 वोटों को बढ़त दिलाई । इन तमाम चीजों से ही उनके क्षेत्र में उनकी पकड़ और प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है । जिला कांग्रेस कमेटी से लेकर, प्रदेश कांग्रेस कमेटी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी तक के कार्यक्रमों में सहभागिता निभाना और अपना सहयोग देना उनकी आदतों में शामिल है ।
राजनीति के अलावा सामाजिक और सहकारी क्षेत्रों में भी मोहन मरकाम की सहभागिता काफी सराहनीय रही है । आदिवासी गोण्ड समाज का अध्यक्ष और आदिवासी विकास परिषद का संभागीय उपाध्यक्ष भी बनाया गया । वही सहकारी क्षेत्र में काम करते हुए उन्होने किसानों एवं ग्रामवासियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जिसके माध्यम से शासन द्वारा मिलने वाले लाभों और योजनाओं से उन्हें अवगत कराने का कार्य किया । 
जनहित से जुड़े मुद्दों पर कार्य करते हुए मोहन मरकाम ने कई आंदोलनों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई । नसबंदी कांण्ड के विरोध में उन्होने पेण्डारी, बिलासपुर से रायुपर तक 150 किमी की पदयात्रा की । वहीं किसानों के बोनस व अन्य मांगों को लेकर बलौदाबाजार से रायपुर तक 50 किमी की पदयात्रा की । उन्होने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ किसानों की समस्याओं और भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध में भी पदयात्रा की । वहीं चुनाव पूर्व पार्टी द्वारा आयोजित परिवर्तन यात्रा में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष रहे टीएस सिंहदेव के साथ जगदलपुर से कोण्डागांव व डोंगरगढ़ से रायपुर तक पैदलयात्रा में शामिल रहे । 
इसके अलावा प्रदेश व क्षेत्र की खुशहाली के लिए क्षेत्र के लोगों व सैकड़ों श्रृद्धालुओं के साथ बस्तर की अराध्य देवी मां दंतेश्वरी के द्वार दंतेवाड़ा तक 170 किमी की लगातार 03 वर्षों तक पदयात्रा कर अमन चैन की प्रार्थना की। 
नगरनार स्टील प्लाण्ट के निजीकरण के विरोध, नगरनार के कर्मचारियों, भूविस्थापितों एवं अन्य मांगों को लेकर पदयात्रा किया गया । 
मोहन मरकाम ने कांग्रेस पार्टी के लिए कार्य करते हुए अपने पूरे विधानसभा क्षेत्र 83 में सदस्यता अभियान हेतु सायकल से यात्रा की और लोगों को पार्टी से जोड़ने का कार्य किया । 
मोहन मरकाम पार्टी के संगठन में बुथ अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, जिला प्रतिनिधि, प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य और वर्तमान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य हैं । पूर्व प्रदेश अध्यक्ष माननीय धनेन्द्र साहू जी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष माननीय डाॅ चरण दास महंत जी के साथ संगठन में काम करने का अवसर प्राप्त हुआ । 
पिछले पांच वर्षों में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष व छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल जी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष व पंचायत मंत्री माननीय टी एस सिंहदेव जी के जुगलबंदी के साथ लगातार संगठन की हर गतिविधियों में कदम से कमद मिलाकर साये की तरह शामिल रहे ।  
मोहन मरकाम ने शासकीय सेवा के रूप में शिक्षाकर्मी वर्ग 1 व शिक्षाकर्मी वर्ग 2 के रूप में भी कार्य किया । इसके अलावा उन्होने कुछ दिनों तक भारतीय जीवन बीमा निगम में विकास अधिकारी और भारतीय स्टेट बैंक लाईफ में सीनियर एजेंन्सी मैनेजर के रूप में भी कार्य किया, मगर जनहीत की सेवा करने की ललक ने उन्हें शासकीय व अर्द्ध शासकीय सेवा से इस्तिफा, 4-4 शासकीय सेवा छोड़कर आज इस मुकाम पर पहुचे हैं । ग्रामीण परिवेश में पले बढ़े गांवों की समस्याओं को नजदीक से देखकर मन द्रवित हो जाता था, मूलभूत सुविधाएं नहीं होती थी, कुछ करने, कुछ कर दखाने की तमन्ना, ललक मन मे लेकर राजनीति के क्षेत्र में कदम बढ़ाया । लम्बे संघर्ष के बाद सुखद परिणाम आया ।
अपनी उम्र के 51 बसंत पूरे चुके इस कांग्रेस नेता ने हमेशा पार्टी के सिद्धांतो को आगे बढ़ाने का कार्य किया और एक वफादार सिपाही की तरह हर मोड़ पर पार्टी के साथ खड़े होकर कांग्रेस की नीतियों को जन जन तक पहुंचाने का कार्य का किया ।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में अपना दायित्व निभा रहे हैं । प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में इनके नेतृत्व में हुए चनाव में एक भी चुना नहीं हारने का रिकार्ड बना है । दो उप चुनाव, नगरीय निकाय चुनाव व पंचायत चुनाव में एैतिहासिक जीत मिली है।  

सार्वजनिक एवं राजनैतिक जीवन का संक्षिप्त विकास क्रम

वर्ष 2013 - प्रथम बार विधान सभा निर्वाचित
वर्ष 2015 - सदस्य, याचिका समिति
वर्ष 2016 - सदस्य, पुस्तकालय समिति
वर्ष 2017 - सदस्य, आचरण समिति
वर्ष 2018 - उत्कृष्ठ विधायक के रूप मे सम्मानित
सदस्य, नियम समिति
सदस्य, शासकीय आश्वासनों संबंधी समिति
वर्ष 2019 - सभापति, विशेषाधिकार समिति 
सदस्य, लोक लेखा समिति
सदस्य, सामान्य प्रयोजन समिति
वर्ष 2020 - सभापति, विशेषाधिकार समिति सदस्य, 
सदस्य, लोक लेखा समिति 
सामान्य प्रयोजन समिति
आदिवासी समुदाय को जल, जंगल और जमीन से जोड़ने की हो रही सार्थक पहल
हमारी सरकार द्वारा जनजाति वर्गों की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। नई प्रक्रिया के अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासियों के परिवार में शिशु के जन्म के समय उसके पिता की जाति के आधार पर शिशु का जाति प्रमाण पत्र भी निर्धारित प्रारूप में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में पहली बार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन गत वर्ष 27 से 29 दिसम्बर तक राजधानी रायपुर में किया गया। 
हमारी सरकार ने आदिवासी अंचल बस्तर में एक नई पहल करते 40 सालों से लंबित बोधघाट बहुद्देशीय सिंचाई परियोजना के काम को आगे बढ़ाने की कार्यवाही शुरू की है। केन्द्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इसके सर्वे का काम भी शुरू करा दिया गया है। यह परियोजना बस्तर संभाग में खेती-किसानी और समृद्धि का नया इतिहास लिखेगी। इस परियोजना की लागत 22 हजार 653 करोड़ रुपये है। इससे दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले में 3 लाख 63 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होगी। बस्तर में अब बारूद और बंदूक खेती के बजाए फसल लहलहाएगी।
इस परियोजना के माध्यम से 300 मेगा वॉट विद्युत उत्पादन भी किया जाना प्रस्तावित है। यह परियोजना इन्द्रावती नदी पर प्रस्तावित है, जो गिदम से 10 किलोमीटर और संभागीय मुख्यालय जगदलपुर से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के विकास के लिए इन्द्रावती नदी विकास प्राधिकरण का भी गठन किया गया है।
हमारी सरकार द्वारा आदिवासी समुदाय को जल, जंगल और जमीन से जोड़े रखने की सार्थक पहल की गई है। बस्तर और सरगुजा में सिंचाई का प्रतिशत काफी कम है। नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी योजना के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया जीवन प्रदान किया जा रहा है। इसमें यहां के नालों को रिचार्ज करने का काम किया जा रहा है। जिससे सिंचाई के लिए सतही जल और भूमिगत जल की उपलब्धता बढ़ेगी।
राज्य सरकार द्वारा आदिवासी समाज के हित में विश्व आदिवासी दिवस पर सामान्य अवकाश घोषित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। बस्तर और सरगुजा में कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड का गठन करने की घोषणा से स्थानीय युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता मिलेगी। पांचवीं अनुसूची के जिलों में बस्तर, सरगुजा संभाग और कोरबा जिले में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थानीय लोगों की भर्ती के लिए आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट दिया गया है।
एनएमडीसी के नगरनार प्लांट में गु्रप सी और गु्रप डी की भर्ती परीक्षा दंतेवाड़ा में ही कराने को लेकर एनएमडीसी द्वारा सहमति दी गई है। मुख्यमंत्री ने नक्सल पीड़ित युवा बेरोजगारों को डीएमएफ मद से बीएड की डिग्री पूर्ण होने पर रोजगार प्रदान करने की घोषणा की है। इसी प्रकार भोपालपट्टनम में बांस आधारित कारखाना स्थापित करने की पहल की जा रही है।
अनुसूचित जनजाति के समग्र विकास के लिए बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण और मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण (रायपुर, दुर्ग एवं बिलासपुर संभाग) का गठन किया गया है। इन तीनों प्राधिकरणों में स्थानीय विधायकों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाया गया है। सरकार ने जनजाति सलाहकार परिषद के कामकाज के लिए पृथक सचिवालय की स्थापना का निर्णय लिया है।
सरकार के इस निर्णय से जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करना अब आसान हो गया है। नक्सल प्रभावित अंचलों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के रहवासियों के विरूद्ध दर्ज प्रकरणों की समीक्षा की जा रही है और इन प्रकरणों की वापसी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है।
राज्य के सभी जिलों में 10-10 छात्रावासों एवं आश्रमों को मॉडल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। प्रथम चरण में राज्य के आदिवासी बाहुल्य जिलों में प्राथमिकता से आश्रमों एवं छात्रावासों का उन्नयन कार्य होगा। प्री-मेट्रिक छात्रावास एवं आवासीय विद्यालय सहित आश्रमों में निवासरत विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति दर में 100 रुपये की वृद्धि कर उन्हें अब 900 रुपये के स्थान पर एक हजार रूपए की शिष्य वृत्ति दी जा रही है।
राज्य में वर्ष 2019-20 में 16 नवीन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे है। मैट्रिकोत्तर छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को छात्र भोजन सहाय के लिए अक्टूबर 2019 से 500 रूपए के स्थान पर प्रतिमाह 700 रूपए दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री द्वारा राज्य के बस्तर अंचल के सुदूर पहुंचविहीन क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए खालेमुरवेंड में 100-100 सीटर बालक एवं कन्या तथा दोरनापाल, तोंगपाल एवं गोलापल्ली में 150-150 सीटर पोस्ट मैट्रिक छात्रावास प्रारंभ किए जा रहे है। वर्ष 2019-20 में 61 तथा वर्ष 2020-21 में 100 आश्रम-छात्रावास भवनों के निर्माण को मंजूरी, बजट में 33.75 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। मिनी माता की स्मृति में छत्तीसगढ़ में 11 कन्या छात्रावासों की स्वीकृति दी गई है।
प्रदेश के दूरस्थ, वनांचल और अंतिम छोर तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा को लोगों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना 02 अक्टूबर को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर शुरू की गई। इस योजना के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के हाट बाजारों में मोबाईल, चिकित्सा यूनिट के माध्यम से लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार की सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही है।
बस्तर संभाग में मलेरिया मुक्ति अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के दौरान लोगों को जागरूक करने के साथ ही इसकी रोकथाम के लिए क्लोरोक्वीन टेबलेट का वितरण भी किया जा रहा है। एनीमिया और मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के तहत घर-घर जाकर लगभग 14 लाख लोगों की रक्त सैम्पल की जांच की है।
हमारी सरकार ने अनुसूचित और अनुसूचित जनजाति के किसानों को भरपूर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कृषि पंपो पर बिजली बिल में पूरी छूट देने का निर्णय लिया। दूरस्थ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थित 462 पुलिस थानों और बेसकैम्पों को सौर ऊर्जा से विद्युतीकृत किया गया है। लोक निर्माण विभाग के माध्यम से संचालित निर्माण कार्यों के द्वारा भी स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है। इन क्षेत्रों में लघु वनोपज पर आधारित लघु उद्योगों और प्रसंस्करण इकाईयों को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया है।
हमारी सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि डीएमएफ की राशि का उपयोग खदान प्रभावित क्षेत्र में लोगों के जीवन में बेहतर परिवर्तन लाने के लिए किया जाएगा। आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण दूर करने के लिए चना वितरण के लिए शासन द्वारा 171 करोड़ रुपये और बस्तर संभाग में प्रति परिवार दो किलो गुड़ वितरण के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बस्तर संभाग में कुपोषण दूर करने के लिए बच्चों और महिलाओं को विशेष पोषण आहार के वितरण का काम प्रारंभ हो चुका है। राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना नीति आयोग ने भी की है।
इसी तरह तेंदूपत्ता संग्रहण की दर ढाई हजार रूपए से बढ़ाकर चार हजार रूपए प्रति मानक बोरा कर दी गई है। यह दर देश में सबसे अधिक है। अब 31 लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही है। इनमें राज्य सरकार द्वारा वनवासियों के हित में अहम निर्णय लेते हुए महुआ के निर्धारित समर्थन मूल्य 17 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये प्रति किलोग्राम की गई है।
इससे वनवासियों को वनांचलों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार देने में तेजी आई है। राज्य में अब तक 112 करोड़ रुपये मूल्य के 4 लाख 75 हजार क्विंटल लघु वनोपजों का संग्रहण हो चुका है। बस्तर में प्रस्तावित स्टील प्लांट नहीं बनने पर लोहंड़ीगुड़ा क्षेत्र के किसानों की अधिगृहित भूमि लौटाने का महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया गया है। यहां आदिवासियों को 4200 एकड़ जमीन वापस कर राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज करने की कार्रवाई भी पूर्ण कर ली गई है।
हमारी सरकार ने आदिवासियों के हित में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं, जिनमें वन अधिकार पट्टों के लिए प्रदेश में पूर्व में अमान्य किए गए आवेदनों पर पुनर्विचार कर पट्टे देने का कार्य किया गया है। 4 लाख 22 हजार व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र और 30 हजार 900 सामुदायिक वन अधिकार पत्र वितरित किए गए।
व्यक्तिगत वन अधिकार मान्यता के माध्यम से 3.81 लाख हेक्टेयर भूमि और सामुदायिक वन अधिकार पत्रों में 12.37 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि आवंटित की गई। नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले के लगभग 275 असर्वेक्षित ग्रामों में वर्षों से निवासरत 50 हजार से अधिक लोगों को उनके कब्जे में धारित भूमि का मसाहती खसरा और नक्शा उपलब्ध कराए जाने का निर्णय लिया गया।
इस निर्णय से किसान परिवारों के पास उनके कब्जे की भूमि का शासकीय अभिलेख उपलब्ध हो सकेगा और वे अपनी काबिज भूमि का अंतरण कर सकेंगे। इससे अबूझमाड़ क्षेत्र के अंतर्गत लगभ 10 हजार किसानों को 50 हजार हेक्टेयर भूमि का स्वामित्व प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री माननीय श्री भूपेश बघेल जी ने हाल में ही नवा रायपुर में आदिवासी संग्राहालय के स्थापना की घोषणा की है ।
इतिहास गवाह है राज्यसभा सांसद के लिए बस्तर संभाग से अब तक किसी पार्टी ने अवसर प्रदान नहीं किया गया । पिछले 15 वर्षों तक भाजपा ने बस्तर का दोहन किया । हमारी कांग्रेस पार्टी ने माननीय श्रीमती फुलोदेवी नेताम जी को राज्य सांसद के रूप में बस्तर से प्रतिनिधित्व का अवसर दिया ।
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