छत्तीसगढ़ राजनीति G-23 की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी बागी हो रहा G-15

रायपुर।कांग्रेस के केंद्रीय संगठन के खिलाफ आवाज उठा रहे जी-23 की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी विधानसभा चुनाव हारे कांग्रेसियों ने जी-15 तैयार कर बागी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। इन नेताओं का कहना है कि पहली बार चुनाव लड़े करीब आठ उम्मीदवारों को चुनाव में सिर्फ जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जकांछ) के उम्मीदवार के कारण हार का सामना करना पड़ा।

कहा- हार की वजह बने जकांछ नेताओं का प्रवेश कराकर दे रहे ज्यादा महत्व

सत्ता में आने के बाद पार्टी ने जकांछ के उन नेताओं का न सिर्फ कांग्रेस प्रवेश कराया, बल्कि उनकी सत्ता और संगठन में दमदार उपस्थिति भी है, जबकि पार्टी के प्रति निष्ठा रखने वालों को दरकिनार कर उनकी सीट पर दूसरी पार्टी से आए और सत्ता के करीबी नेताओं को दावेदार के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में हासिये पर रख दिए गए कांग्रेस नेताओं ने राजधानी की एक होटल में बैठक की। इसमें ऐसे 11 नेता पहुंचे। चार ने वर्चुअल उपस्थिति दी।

दरअसल, चुनाव हारने के बाद सत्ता और संगठन ने इन विधायकों को छाया विधायक तो बना दिया, लेकिन इनके काम नहीं हो रहे हैं। बैठक में शामिल जांजगीर-चांपा के पूर्व विधायक मोतीलाल देवांगन ने बताया कि चुनाव हारने के बाद भी हम पार्टी के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाह रहे हैं।

कोरोना की वजह से डेढ़-दो साल से किसी से मुलाकात नहीं हो रही थी। बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया और प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम से मुलाकात करने का निर्णय लिया गया है। एक कांग्रेस नेता ने बताया कि बैठक में शामिल चुनाव में हार के कारणों पर चर्चा की गई। भाटापारा में सुनील माहेश्वरी की हार जकांछ उम्मीदवार चैतराम साहू के कारण हुई।

चुनाव के कुछ दिन बाद ही चैतराम को पार्टी में शामिल कर लिया गया। धमतरी में गुरुमुख सिंह होरा 500 से कम वोट से हारे थे। उनके खिलाफ बागी आनंद पवार ने ताल ठोंकी थी। पवार को भी पार्टी में शामिल कर लिया गया है। बिल्हा में राजेंद्र शुक्ल की हार की प्रमुख वजह सियाराम कौशिक बने। आज वो भी पार्टी में आ गए हैं। बैठक में शामिल कांग्रेस नेताओं का कहना था कि जकांछ से कांग्रेस में आए नेता सरकार बनने के बाद ताकतवर बनकर उभरे हैं, जबकि जिन लोगों ने लगातार 15 साल संघर्ष किया, उनको कमजोर किया जा रहा है।

इन नेताओं की रही मौजूदगी

पूर्व विधायक गुरुमुख सिंह होरा, मोतीलाल देवांगन सहित पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े सुनील माहेश्वरी, राजेंद्र शुक्ला, अनिल चंद्रा, गोरेलाल बर्मन, संजय नेताम, शत्रुघ्न सोनू चंद्राकर, राजेंद्र साहू और राकेश पात्रे। पूर्व विधायक गिरवर जंघेल, विभोर ठाकुर, लक्ष्मण मस्तुरिया और लक्ष्मी साहू वर्चुअल शामिल हुए।

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