Weenews - बेटी से दुष्कर्म में मामले में ढाई साल बाद आया फैसला, कोर्ट ने पुलिस की तफ्तीश के आधार पर कलयुगी पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

बिलासपुर. अपनी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले कलयुगी पिता को निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। ढाई साल आए फैसले में कोर्ट ने पुलिस की पूरी जांच को बारीकी से देखा और इन्ही गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ पास्को एक्ट की धाराओं के तहत आजीवन कारावास का आदेश जारी किया है।

प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश एसटीएफसी विवेक कुमार तिवारी ने अपनी ही नाबालिग बेटी से जोर जबरदस्ती कर उसके साथ दुष्कर्म करने वाले पिता को आखिरकार ढाई साल के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मिली जानकारी के अनुसार सिविल लाइन क्षेत्र के तालापारा निवासी आदतन नशे का आदि एक पिता ने अपनी ही नाबालिग बेटी को हवस का शिकार बनाया घटना दो साल पूर्व यानी 10/10/2018 की है। जब देर रात नशे की हालत में आरोपी पिता ने पहली बार बेटी से जोर जबरदस्ती किया था उस वक्त पीड़िता आरोपी को धक्के मारकर कर भाग गई अपनी असमत बचाई और घटना की जानकारी परिजनों को दी, लेकिन लोक लाज के डर से उसके परिजनों ने चुप रहने की सलाह देकर मामले को दबा दिया। यही से आरोपी पिता की हिम्मत और बढ़ी और वह मौका देख नाबालिग बेटी के साथ अश्लील हरकत करने लगा था। एक हफ्ते बाद एक बार फिर आरोपी अपने मंसूबे मे कामयाब हो गया।

कोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार यह सिलसिला दो माह तक लगातार जारी रहा जिसके बाद थक हार कर पीड़िता की सहन शक्ति टूटी और उसने 6 दिसंबर 2018 को महिला थाने में कुकर्मी पिता के खिलाफ जुर्म दर्ज करा दिया। इधर इस मामले की जांच कर रही तत्कालीन महिला थाना प्रभारी रोशनी वासनिक ने अपनी टीम महिला आरक्षक अहिल्या भगत,सोमप्रभा कतलम, माया पाण्डेय और आरक्षक उमेंद्र खूंटे के साथ पीड़िता का बयान दर्ज किया और बारिकी से एक के बाद एक उसके परिजनों से पूछताछ की,पुलिस जांच के दौरान आरोपी पिता खुद को बेगुनाह बता रहा था। टीआई वासनिक व उनकी टीम ने को जांच के दौरान पता चला कि घटना के समय पीड़िता 11वी क्लास में पढ़ रही थी। वही स्कूल प्रबंधन का भी बयान दर्ज किया गया। डॉक्टर मनीष श्रीवास्तव व अन्य डॉक्टरों की रिपोर्ट पुलिस के हाथ आते ही पुलिस ने कलयुगी पिता को हिरासत में लिया और कोर्ट में पेश कर जेल दाखिल करा दिया।

घटना का करीब ढाई साल कोर्ट में ट्रायल के बाद मजिस्ट्रेट विवेक कुमार तिवारी की कोर्ट ने पुलिस जांच में गवाहों और पीड़िता के बयान को सही पाया और आरोपी पिता की सजा बढा के उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

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