20 वर्षों से किसानों को नहीं मिली खाद तहसील के अधिकारी बने बेपरवाह

बिडम्बना
बीस वर्षों से किसानों को नहीं मिली खाद
तहसील के अधिकारी बने बेपरवाह
किसानों की शिकायत को किया दरकिनार
मजबूरी 
महंगे दामों में खरीदनी पड रही खाद
अखिल भारतीय ओबीसी महासभा ने सौंपा ज्ञापन
सिहोरा
जहां एक ओर खाद के संकट से जूझ रही प्रदेश की सरकार किसानों के अंडर प्रेशर में दिख रही है, वही सिहोरा तहसील की बुढागर सोसाइटी से एक बड़ी खबर निकल कर सामने आई है,  जहां पर किसानों को सोसाइटी से दो दशको से खाद नहीं मिल पा रही और ऐसे गंभीर मामले मे अधिकारियों की चुप्पी व बेपरवाही निश्चित रूप से किसान विरोधी एवं सरकार की साख पर बटटा लगाने जैसी झलक रही है।
 
ओबीसी किसान महासभा के द्वारा गुरुवार को सिहोरा एसडीएम के नाम एक ज्ञापन नायब तहसीलदार राहुल मेश्राम को सौंप कर तहसील में खाद की उपलब्धता,  बिजली कटौती बंद करने, नहरों की मरम्मत,  धान खरीदी केंद्र शीघ्र चालू करने के लेकर ज्ञापन सौंपा।

डीएपी और यूरिया के लिए लाचार और बेबस किसान, खाद का दाना नसीब नहीं हुआ

अखिल भारतीय ओबीसी किसान मोर्चा के के जिला अध्यक्ष रामराज पटेल, अखिल भारतीय ओबीसी महासभा ओबीसी एसी-एसटी संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष छोटे पटेल, आनंद पटेल, भोला यादव, राम मिलन यादव, बृज मोहन पटेल, बृजेंद्र पटेल, सत्येंद्र पटेल, सुखलाल पटेल, विश्वेश्वर पटेल, दिलीप पटेल, अनिल पटेल, अर्पित पटेल, विमल किशोर, संत राम पटेल, मनोज पटेल. शीतल प्रसाद पटेल, राजेंद्र दहिया. रामदयाल पटेल, महेश दहिया, संत कुमार बैस  ने बताया की जहां एक ओर अपने आपको किसान हितेषी बताने वाली सरकार कार्यक्रमों के चलते मंचों से अपनी वाह वाही तो लूट लेते है,  परंतु वास्तविकता इससे परे है
देश का अन्नदाता कहा जाने वाला किसान खून पसीने की मेहनत से फसल तो उगाता है परंतु उसे अपनी खेती में लगने वाली खाद पानी बिजली के लिए कितना वेवश व लाचार होना पड़ता है इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि
सिहोरा तहसील के अंतर्गत संचालित सेवा सहकारी समिति बुढागर में पिछले बीस वर्षों से किसानों को सस्ते दामों पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया डीएपी खाद का दाना नसीब नहीं हुआ।

वित्तीय अनियमितताओं के चलते सोसाइटी को घोषित कर दिया गया था डिफाल्टर

ज्ञात हो की बुढागर सोसायटी वितीय गबन के चलते इस संस्था की साख डिफाल्टर हो गई है। जिस कारण यहां पर पिछले बीस वर्षों से सोसाइटी के अंतर्गत आने वाले गांव देवनगर, पथरई, मिढासन, गांधीग्राम रामपुर, मालहा, धमकी,घोराकोनी धरमपुरा, हृदयनगर, धमधा, महगंवा के लगभग एक हजार किसानों को मजबूरी में खुले बाजार से मनमाने दामों में महंगी व गुणवत्ताहीन खाद खरीदनी पड़ती है।

अधिकारियों को दी लिखित शिकायत, लेकिन कर दिया गया अनसुना

पीड़ित किसानों ने बताया की गत वर्ष सिहोरा एसडीएम जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर मांग की गई थी की हम समस्त कृषकों को बुढागर सोसाइटी से खाद उपलब्ध कराई जाए। परंतु किसानों की उक्त शिकायत को संबंधित विभाग के अधिकारियों ने अनसुना कर दिया, जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है।

नहीं मिली थंब मशीन, केसीसी से भी नहीं मिल रही खाद

उल्लेखनीय है की गत वर्ष उक्त संस्था का कृषि विभाग द्वारा खाद विक्रय का लाइसेंस तो बना दिया गया है, परंतु आज तक थंब मशीन नहीं दी गई अधिकारियों की लापरवाही के चलते संस्था के अंतर्गत आने वाले किसानों को न तो संस्था से नगद में खाद मिल रही और न ही केसीसी के माध्यम से मिल पा रही। ऐसी स्थिति में मजबूरी में किसानों को मार्केट से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ती है।
Previous Post Next Post