Ticker

6/recent/ticker-posts

2000 रुपए प्रति क्विंटल की धान 16 सौ में बेचने को मजबूर अन्नदाता

2000 रुपए प्रति क्विंटल की धान 16 सौ  में बेचने को मजबूर अन्नदाता

कृषि उपज मंडी सिहोरा में किसानों ने बताई अपनी पीड़ा

बोले व्यापारियों को नहीं बेचेंगे धान तो रवि फसल की तैयारी के लिए कहां से लाएंगे नगद रुपए


सिहोरा

समर्थन मूल्य पर धान की सरकारी खरीद  29 नवंबर से शुरू करने के दावे प्रशासन तो बड़े जोर शोर से कर रहा है, लेकिन हकीकत इससे पूरी तरह उलट है। खरीदी केंद्रों की उद्घोषणा नहीं हुई समितियों से जुड़े गांव के मैपिंग का काम अधूरा पड़ा है। ऐसे में तय समय सीमा में धान की खरीदी कैसे शुरू होगी। रवि फसल की तैयारी को लेकर किसानों को इस समय नगद रुपए की सबसे ज्यादा जरूरत है। धान का सरकारी खरीदी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने के बावजूद अन्नदाता ₹2000 प्रति क्विंटल की धान सोलह ₹100 में बेचने को मजबूर है। किसानों का कहना है कि उन्हें खाद बीज और जताई के लिए समय नगद रुपयों की सबसे ज्यादा जरूरत है अगर वह व्यापारियों को ध्यान नहीं बेचेंगे तो बोवनी कैसे करेंगे। 

सिहोरा कृषि उपज मंडी में धान बेचने पहरूआ से आए किसान मनोहर प्रसाद पटेल ने बताया कि उन्होंने धान बेचने के लिए सोसाइटी में रजिस्ट्रेशन कराया था। लेकिन रवि फसल की तैयारी के लिए उनके पास नगद रुपया नहीं है। गेहूं का बीज खरीदना है खाद खरीदनी है जोताई के लिए ट्रैक्टर वाले को पैसा देना है इसलिए मजबूरी में 1550 रुपए प्रति क्विंटल धान बेचनी पड़ रही है। व्यापारी को अगर ध्यान नहीं बेचेंगे तो गेहूं की बोनी कैसे होगी। वही अमरगढ़ से आए राम मिलन चक्रवर्ती ने बताया कि उन्होंने तो 1470 रुपए प्रति क्विंटल धान बेच दी।  वे कहते हैं कि धान की खरीदी कब शुरू होगी कब उनका मैसेज आएगा कब धान बिकेगी और कब पैसा आएगा। धान खरीदी शुरू होने का इंतजार अगर करते रहे तो हो चुकी गेहूं की बोनी।


यही हाल दूसरे किसानों का जो धान बेचने मंडी आए

कुछ ऐसा ही हाल कृषि उपज मंडी में धान बेचने आए सिहोरा और मझौली तहसील के अलग-अलग क्षेत्र के किसानों का था हर किसी का यही कहना था कि उन्हें इस समय नगद रुपयों की सबसे ज्यादा जरूरत है। पैसा नहीं होगा तो कैसे बोनी का काम हो पाएगा सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे किसानों की है जिनके पास जमीन ए कम है और अगले सीजन की फसल के लिए हाथ में पैसा भी नहीं है। मजबूरी में छोटे किसानों को अपनी उपज व्यापारियों को मंडी में औने पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है।


प्रति एकड़ 13500 से अधिक की लागत आती है धान की खेती में

किसानों की मानें तो धान की फसल में सबसे ज्यादा लागत लगती है। बीज, खाद रोपा,  हार्वेस्टर से कटाई, धान की साफ करवाई शाहिद प्रति एकड़ करीब 13500 रुपए प्रति एकड़ से अधिक का खर्चा आता है। और साथ में किसान की मेहनत इसके बावजूद उसकी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता।