स्कूल जाने की उम्र में नाबालिक ऑटो से स्कूली बच्चों को छोड़ रहे घर जवाबदार कौन?

स्कूल जाने की उम्र में नाबालिक ऑटो से स्कूली बच्चों को छोड़ रहे घर जवाबदार कौन?

स्कूली बच्चों को बिठाकर नाबालिक चला रहे ऑटो, सिहोरा पुलिस और प्रशासन बना मूकदर्शक

सिर्फ चालानी कार्रवाई तक सीमित रहती है पुलिस की कार्रवाई

हेलमेट मास्क और गाड़ी के जरूरी कागज नहीं तो चालान के लिए रहें तैयार

सिहोरा

अगर आपने हेलमेट नहीं पहना है और दो पहिया वाहन में तीन लोग बैठे हैं तो आपका चालान कटना निश्चित है। चाहे बात सिहोरा के मझौली बाईपास रोड की हो या खितौला मोड़ की या फिर नृसिंह मंदिर के पास बाईपास की। हर जगह पुलिस हेलमेट बीमा आरटीओ और लाइसेंस के नाम पर लोगों का चालान काट देती है लेकिन सिहोरा नगर के बीचो बीच गौरी तिराहे पर खुलेआम एक नाबालिक स्कूली बच्चों को ऑटो पर बैठा कर उन्हें स्कूल से घर ड्रॉप कर रहा था, लेकिन पुलिस और प्रशासन को यह देखने की फुर्सत कहां है उन्हें तो बस सिर्फ चालान काट कर सरकार को यह दिखाना है कि लोगों को नियम कानून में चलने की हिदायत दे रहे हैं।

यह पूरा घटनाक्रम

सिहोरा नगर के बीचो-बीच स्थित गौरी तिराहे पर मंगलवार करीब 4:00 बजे के लगभग ऑटो क्रमांक एमपी 21आर 5060 में एक 14 साल का लड़का स्कूल यूनिफार्म में बैठे तीन से चार बच्चों को स्कूल से घर ड्रॉप कर रहा था। यदि इस नाबालिक बच्चे द्वारा ऑटो चलाते समय कोई हादसा हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा पुलिस या प्रशासन! यह एक बहुत ही बड़ा यक्ष प्रश्न है।

वाहन मालिक भी कम जिम्मेदार नहीं

पैसा कमाने की चाहत में वाहन मालिक चाहे भले ही इस बच्चे के पिता हों। इस नाबालिग और ऑटो में बैठे मासूम बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी लापरवाही इस वाहन के मालिक की है जो इस नाबालिग बच्चे के हाथ में ऑटो की स्टेरिंग थमा रहे हैं।
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