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सरकार कराए जातिगत आधारित जनगणना, पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण अध्यादेश पुनः बहाल हो

सरकार कराए जातिगत आधारित जनगणना, पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण अध्यादेश पुनः बहाल हो

अखिल भारतीय ओबीसी महासभा (ओबीसी, एससी एसटी संयुक्त मोर्चा) ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

रैली के रूप में पहुंचे सिहोरा एसडीएम कार्यालय जमकर की नारेबाजी 




सिहोरा

अखिल भारतीय ओबीसी महासभा(ओबीसी, एससी-एसटी संयुक्त मोर्चा) ने सोमवार को मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि अब तक कि केंद्र व राज्य में जो भी सरकारें रहीं उन्होंने ओबीसी के हितों अधिकारों को अनदेखा करते हुए 74 वर्षों की आजादी में आज तक जातिगत जनगणना नहीं कराई। जिसके कारण आंकड़े ना होने पर न्यायालयों द्वारा पूरे देश में ओबीसी के अधिकारों को समाप्त किया जा रहा है। अभी वर्तमान में मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव में न्यायालय द्वारा जातिगत आंकड़े सरकारों द्वारा प्रस्तुत न करने पर ओबीसी का आरक्षण समाप्त कर दिया। इसलिए हम केंद्र और राज्य सरकारों से मांग करते हैं कि ओबीसी की जातिगत जनगणना कराई जाए एवं न्यायालय द्वारा ओबीसी के आरक्षण को रद्द करने के आदेश को अध्यादेश के माध्यम से शून्य कर ओबीसी के आरक्षण के साथ ही मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव कराए जाएं।

रैली के रूप में पहुंचे एसडीएम कार्यालय, जमकर की नारेबाजी
दोपहर एक बजे के लगभग ओबीसी महासभा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता सिहोरा एसडीएम कार्यालय पहुंचे। ओबीसी महासभा के के प्रदेश अध्यक्ष इंद्र कुमार पटेल, जिला अध्यक्ष छोटे पटेल, जिला उपाध्यक्ष राम राज पटेल, जिला सचिव अखिलेश शारदानंद, ब्लॉक अध्यक्ष जितेंद्र कुमार कुर्मी, किसान समाज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीवान जितेंद्र पटेल, किसान मोर्चा जिला उपाध्यक्ष हेमराज काछी, किशन पटेल राजेंद्र दहिया संत कुमार तंतु बाय कैलाश दहिया विजय पटेल शीतल पटेल अवधेश पटेल वीरेंद्र पटेल किशन पटेल अरविंद पटेल साथ बड़ी संख्या में अखिल भारतीय ओबीसी महासभा के पदाधिकारियों ने जमकर नारेबाजी की। 


मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को को सौंपा ज्ञापन

अखिल भारतीय ओबीसी महासभा, किसान समाज संगठन, किसान मोर्चा के सैकड़ों पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार राकेश चौरसिया को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगों का शीघ्र निराकरण किए जाने की बात कही। ओबीसी महासभा ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं होती तो पूरे प्रदेश में देशव्यापी आंदोलन के लिए उन्हें बाध्य होना पड़ेगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी केंद्र सरकार और राज्य सरकार की होगी।