जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे गांव, सरपंच और पंच पद के अभ्यर्थियों ने नाम निर्देशन पत्र वापस लेकर जताया विरोध

जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे गांव, सरपंच और पंच पद के अभ्यर्थियों ने नाम निर्देशन पत्र वापस लेकर जताया विरोध

जनपद पंचायत मझौली की ग्राम पंचायत झिंगरई में रोड नहीं बनने से पंचायत चुनाव के बहिष्कार किया था ऐलान


ग्रामीण बोले गांव का एक व्यक्ति भी नहीं डालने जाएगा वोट


मझौली

जनपद पंचायत मझौली की ग्राम झिंगरई में डेढ़ किलोमीटर पक्की सड़क नहीं बनने से आक्रोशित ग्रामीणों ने सामूहिक रुप से पंचायत चुनाव का बहिष्कार का ऐलान किया था। ग्रामीणों ने पंचायत चुनाव के बहिष्कार को लेकर इसकी सूचना ज्ञापन के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी सिहोरा को दी थी। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी गांव नहीं पहुंचे। ग्राम पंचायत चुनाव के लिए सरपंच पद 4, पंच के अभ्यर्थियों द्वारा भरे गए नाम निर्देशन पत्र आखरी दिन वापस ले लिए। अभ्यर्थियों द्वारा नाम निर्देशन पत्र वापस लेने के बाद अब ग्राम पंचायत में सरपंच और पंच पद के लिए कोई भी प्रत्याशी नहीं बचा है। आक्रोशित ग्रामीणों के साथ नाम निर्देशन पत्र वापस लेने वाले सरपंच और पंच पद के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। 


' सभी नेता सो रहे हैं रोड के लिए हम रो रहे हैं'

किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के ग्राम पंचायत में नहीं पहुंचने पर आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों ने सामूहिक चुनाव बहिष्कार के बैनर के साथ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने नारा दिया कि 'सारे नेता सो रहे हैं रोड के लिए हम रो रहे हैं'। ग्राम के ब्रज मोहन पटेल, राजकुमार पटेल, निरंजन पटेल, अर्जुन पटेल, रामप्रसाद दाहिया, रवि पटेल ने आरोप लगाया कि कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ऐसे में अब आप हमारे पास सामूहिक रुप से चुनाव बहिष्कार के अलावा कुछ शेष नहीं बचता। 

उम्मीदवारों ने वापस लिए अपने नाम निर्देशन पत्र, सरपंच और पंच के लिए नहीं रहा कोई भी प्रत्याशी

पंचायत चुनाव को लेकर एससी सीट के लिए चार लोगों ने सरपंच पद के लिए नाम निर्देशन पत्र दाखिल किए। इसके अलावा पंच के 17 वार्डों के लिए 4 लोगों ने नामांकन दाखिल किए थे। सड़क नहीं बनने को लेकर ग्रामीणों के साथ इन सभी उम्मीदवारों ने गुरुवार को नाम निर्देशन पत्र वापस ले लिए। अब ग्राम पंचायत में कोई भी सरपंच और पंच पद का प्रत्याशी नहीं रह गया। गांव के अरविंद पटेल, विनोद दहिया, महेश प्रसाद काछी, बलराम पटेल संतोष चौधरी दुर्गा प्रसाद दहिया, शरद विश्वकर्मा का कहना था कि वह किसी भी जनप्रतिनिधि को गांव के अंदर घुसने नहीं देंगे।
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