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गर्भस्थ शिशु के समुचित विकास के लिए अनिवार्य है पुंसवन संस्कार

गर्भस्थ शिशु के समुचित विकास के लिए अनिवार्य है पुंसवन संस्कार

'आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी' श्री शिव मंदिर बाबा ताल में पुंसवन संस्कार महोत्सव का आयोजन

सिहोरा

पुंसवन संस्कार... सोलह संस्कारों में से दूसरा संस्कार है। यह किसी भी गर्भवती महिला के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, आजकल इस महत्व बेहद कम हो चला है। श्री शिव मंदिर बाबा ताल में गायत्री शक्तिपीठ जबलपुर एवं महिला बाल विकास सिहोरा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से संस्कार महोत्सव श्री शिव मंदिर बाबा ताल में मंगलवार को आयोजित किया गया।
पुंसवन संस्कार महोत्सव में गर्भवती महिलाओं को बताया गया कि गर्भघारण करने के तीन महीने पश्चात शिशु के मस्तिष्क का विकास शुरु हो जाता है। इसी समय पुंसवन संस्कार के द्वारा माता के गर्भ में पल रहे शिशु में संस्कारों की नींव रखी जाती है। शिशु इसी समय गर्भ में काफी कुछ सीखना शुरू कर देता है। कहते हैं इस द्वितीय संस्कार को करने से संतान एक दम हष्ट-पुष्ट होती है। साथ ही गर्भास्थ शिशु की रक्षा भी होती है। 

  गायत्री शक्तिपीठ जबलपुर एवं महिला बाल विकास सिहोरा के आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से संस्कार महोत्सव संपन्न हुआ। 'आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी' गर्भकाल नहीं शिशु में किस प्रकार से अच्छे संस्कार आएं इसको लेकर आंगनबाड़ी के माध्यम से एवं गायत्री परिवार और महिला ब्राह्मण सभा एवं समस्त महिला संगठनों ने संस्कार महोत्सव संपन्न कराया। महिला बाल विकास अधिकारी इंद्र कुमार साहू, गायत्री परिवार पूरा के एनके गर्ग ने बताया कि गर्भस्थ शिशु को प्रत्येक दिन में कम से कम 5000 शब्द के पोषण की आवश्यकता होती है। गर्भस्थ शिशु में यह क्षमता होती है कि वह 5000 शब्दों को आत्म साफ कर सके सामान्य तौर पर इस जानकारी से बहुत से लोग अनभिज्ञ रहते हैं। पुंसवन संस्कार महोत्सव में भारती बर्मन सारिका साहू, शिल्पी पटेल, उषा मल्लाह, रुकमणी रैकवार, दीप्ति मिश्रा, ममता चौरे, मधु नामदेव, श्री राम कुमार सेन, रामजी बर्मन, बलराम, प्रमोद वर्मा, ओम बर्मन, भगवानदास, हरीश विश्वकर्मा, सहित अनेक गायत्री परिवार के सदस्य उपस्थित थे।