महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी के विरुद्ध जांच करने गई टीम बैरंग लौटी अधिकारी पर है गंभीर आरोप

बिलासपुर के तत्कालीन जिला परियोजना अधिकारी सुरेश सिंह पर आर्थिक अनियमितता सहित महिला अधिकारियों को मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर मामले को लेकर जांच के लिए बनी कमेटी तीन माह बाद भी कोई नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। जबकि, डायरेक्टर ने अपने आदेश में कमेटी को एक माह के भीतर जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा था। लेकिन, टीम में शामिल अफसर जांच में लीपापोती कर रहे हैं। यही वजह है कि अब तक टीम की जांच ही शुरू नहीं हो पाई है। बुधवार को भी टीम बिलासपुर पहुंची थी। लेकिन, दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पाने के बहाने फिर से बैरंग लौट गई।

सुरेश सिंह बिलासपुर में लगभग 15 वर्षों तक जिला परियोजना अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। उनके खिलाफ बहुत सारी गंभीर शिकायतें मिलने के बाद अगस्त माह में उनका तबादला सुकमा कर दिया गया है। इधर, महिला बाल विकास विभाग की डायरेक्टर दिव्या मिश्रा ने सुरेश सिंह के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच के लिए कमेटी बनाई है। उन्होंने चार सदस्यीय कमेटी को एक माह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। जांच कमेटी में ज्वाइंट डायरेक्टर क्रिस्टीना लाल के साथ ही ज्वाइंट डायरेक्टर भावेश दुबे, डिप्टी डायरेक्टर रामजतन कुशवाहा और डिप्टी डायरेक्टर श्रुति नेरकर शामिल हैं।


टीम में शामिल अफसर जांच के लिए तीन से चार बार बिलासपुर का दौरा भी कर चुके हैं। लेकिन, अब तक अधिकारी आर्थिक अनियमितता और स्थापना संबंधी जानकारी तक नहीं जुटा पाए हैं। बुधवार को टीम में शामिल अफसर जांच के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के दफ्तर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने जिला पंचायत के स्थाई समिति की बैठक नहीं बुलाने और जानकारी उपलब्ध न कराने को लेकर शिकायतकर्ता जिला पंचायत सदस्य समुंत यादव का बयान दर्ज किया। इस दौरान ऑफिस के क्लर्क के अवकाश में होने की वजह से उन्हें दस्तावेज नहीं मिल सका। ऐसे में इस गंभीर मामले की जांच में लीपापोती होने की आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि अफसर अब तक तत्कालीन महिला एवं बाल विकास अधिकारी के खिलाफ हुई शिकायतों की फाइल भी नहीं जुटा सके हैं।

जांच अफसर बोले-रिपोर्ट डायरेक्टर को सौपेंगे
जांच अधिकारी भावेश दुबे व रामजतन कुशवाहा ने कहा कि अभी मामले की जांच चल रही है। उन्हें आर्थिक अनियमितता और स्थापना शाखा के संबंधित दस्तावेज नहीं मिले हैं। जिसके कारण जांच नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि अभी शिकायतकर्ताओं का बयान दर्ज किया जा रहा है। जांच की लंबी प्रक्रिया है। जांच पूरी होने के पहले हम कुछ नहीं बता सकते। जांच होने के बाद रिपोर्ट डायरेक्टर को सौंप दी जाएगी।

बाल संप्रेक्षण गृह पहुंची महिला अधिकारी
इस मामले की जांच के लिए रायपुर से आई कमेटी में शामिल महिला अधिकारी क्रिस्टीना लाल व श्रुति नेरकर सरकंडा के नूतन चौक स्थित बाल संप्रेक्षण गृह भी पहुंचे थे। इस बीच उन्हें महिला एवं बाल विकास में मीडिया के आने की सूचना मिल गई। लिहाजा, उन्होंने महिला बाल विकास विभाग की अधिकारी नेहा राठिया को नेहरू चौक में ही छोड़ दिया और रायपुर के लिए रवाना हो गए।

महिला बाल विकास अधिकारी के खिलाफ ये हैं आरोप
1. शासकीय बाल गृह में बालिकाओं को प्रताड़ना, शारीरिक शोषण और गायब होने की शिकायत।
2. जिला पंचायत में महिला एवं बाल विकास के स्थाई समिति की बैठक नहीं बुलाने और जानकारी उपलब्ध नहीं कराने की शिकायत।
3. सरकंडा में पदस्थ परियोजना अधिकारी अणिमा मिश्रा ने मानसिक प्रताड़ना के साथ ही आर्थिक रुप से परेशान करने की शिकायत की है।
4. महिला बाल विकास विभाग में खरीदी सहित अन्य मदों में वित्तीय अनियमितता बरतने को लेकर शिकायत की गई है।

Previous Post Next Post