पलोनी के लिये पानी नही, रबी सीजन की बुवाई हो रही लेट

पलोनी के लिये पानी नही, रबी सीजन की बुवाई हो रही लेट
आराम फरमा रहे अधिकारी, सूखी पड़ी नहरों में पानी छोड़ने की मांग
सिहोरा 
विभाग के अधिकारियों की उदासीनता से किसान नाराज हैं। किसानों का कहना है कि हजारों रुपये महीने वेतन उठाने वाले अधिकारियों का आलम यह है कि फील्ड पर नहरों की दयनीय हालत देखने का इनके पास समय नही है। किसानों का कहना है कि नहराें में पानी नहीं छोड़ने से किसानों को परेशानी हो रही है। किसान गेहूं व चना की बोवनी नहीं कर पा रहे हैं। किसानों ने बाेवनी के लिए पहले से ही खेत में तैयारी कर ली है। किसान नहर में पानी के इंतजार में परेशान हो रहे हैं। इस संबंध में शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए पूर्व जल उपभोक्ता संस्था अध्यक्ष लक्ष्मण प्रसाद काछी ने  नर्मदा घाटी बरगी नहर व्यापवर्तन परियोजना के जल उपभोक्ता संस्था गांधीग्राम की कुंड वितरिका पिपरिया नहर में पानी छोड़े जाने की माँग की है ,जिससे वर्तमान में गेंहूँ, चना की फसल को जरूरी पानी मिल सके। इस सम्बंध में किसानों का कहना है कि धान की फसल काटने के बाद किसानों ने अपने खेतों की जुताई तो कर ली है, किन्तु पलोनी के लिए नहरों से पानी नही मिल पा रहा है।

14 गांव के किसानों को पानी की है सख्त जरूरत

     जल उपभोक्ता गांधीग्राम संस्था के अंतर्गत लगभग 14 ग्रामों  के किसानों को रबी सीजन की फसल के लिए पानी की महती आवश्यकता है। कुण्ड वितरिका पिपरिया में पानी छोड़ने की मांग की जा रही है। जिससे कुंड वितरिका से माइनर व सब माइनर में जरूरत अनुसार पानी उपलब्ध हो सके। 

इन ग्रामों में खेतो को पानी की दरकार

 जल उपभोक्ता संस्था गांधीग्राम की ग्राम बम्होरी, धमकी, मिढ़ासन, पिपरिया,देवनगर,कैलवास,उमरिया,तपा,खुडावल, शहजपुरा, ताला, धनगवां, कुकरई, चन्नौटा के खेतों में किसानों ने लगभग 70 से 80 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में रबी की फसल की खेती करते हैं ।
किसानो ने कहा है कि खेतों को समय पर पानी देने की दरकार की है। लेकिन अभी तक नहरों में पानी नहीं छोड़ने के कारण किसानों में मायूसी छाई हुई है।

....तो पिछड़ जाएगी बुवाई

खेतों से नमी गायब होने के कारण उसे पलेवा करना भी जरूरी है। बिना पलेवा किए यदि गेहूं की बुवाई की गई तो उपज प्रभावित हो जाती है। किसान खेतों को पलेवा करने के लिए माइनर नहरों में पानी आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार इस ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। शीघ्र ही नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो फसल की बुवाई पिछड़ जाएगी
 किसानों का कहना है कि बोरिंग है भी तो मनमाफिक पानी नहीं दे रही है। डीजल काफी मंहगा है ऐसे में यदि बोरिंग से पलेवा करने की सोंची भी जाय तो लागत खर्च का भार बहुत बढ़ जाएगा।किसान प्रकाश मिश्रा, लखन पटेल, धमकी के राम कुमार पांडे, दिनेश पांडे, बम्होरी के मथुरा तिवारी,महेंद्र पटेल, पिपरिया के राजकुमार विश्वकर्मा, बिरजू केवट,मिढ़ासन के  नरेश पटेल,पूरन कोल,पूरन असाटी,पथरई के सुरेश पांडेय, शहजपुरा के वीरेन्द्र पटेल, सुदामा पटेल, ताला के लक्ष्मीपटेल, कैलवास के ब्रह्मानंद पटेल, बृज बिहारी पटेल आदि ने  खेतों को समय पर पानी उपलब्ध कराने की मांग की है।
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