दंभ और अहंकार से जीवन में कुछ हासिल नहीं होता : राघवेन्द्र त्रिपाठी

दंभ और अहंकार से जीवन में कुछ हासिल नहीं होता : राघवेन्द्र त्रिपाठी
श्री राम मंदिर गोसलपुर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा

सिहोरा
श्री राम मंदिर गोसलपुर में  श्रीमद्भागवत पुराण  का धार्मिक आयोजन कथावाचक पौराणिक राघवेंद्र  त्रिपाठी गांधीग्राम के सानिध्य में किया गया है। मंगलवार को तीसरे दिन ध्रुव चरित्र और वामन अवतार की कथा का  प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भक्ति करने के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं है।भक्ति किसी भी उम्र में की जा सकती है। भगवान के परम भक्त ध्रुव ने मात्र पांच वर्ष की आयु में ईश्वर से साक्षात्कार कर लिया था।
वामन अवतार कथा के दौरान कथा व्यास पौराणिक त्रिपाठी ने कहा कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि दंभ और अंहकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता। इसलिए जीवन में परोपकार करो। उन्होंने कहा कि अहंकार, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। यदि हम संसार में पूरी तरह मोह ग्रस्त और लिप्त रहते हुए सांसारिक जीवन जीते हैं, तो हमारी सारी भक्ति एक दिखावा ही रह जाएगी।
वामन अवतार प्रसंग पर श्री त्रिपाठी ने कहा कि राजा बलि ने 100 यज्ञ पूर्ण करने पर स्वर्ग छीनने का प्रयास किया तो इन्द्रादि देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार ब्राह्मण वेष में राजा बलि से भिक्षा मांगी। गुरु के मना करने पर भी राजा बलि ने तीन पग भूमि दान कर दी। भगवान ने तीन पग से पूरी पृथ्वी को नाप लिया। भूमि कम पड़ गई राजा बलि ने अपना सिर आगे बढ़ा दिया। वामन अवतार ने दानवीर राजा बलि से प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया और अहंकार तोड़कर आशीर्वाद के साथ पाताल भेज दिया। श्रीमद्भागवत पुराण की आरती पौराणिक राघवेंद्र त्रिपाठी ने वैदिक मंत्र उच्चारण करते हुए कराई इस अवसर पर आयोजक सीएल पांडे एवं ओमप्रकाश पाण्डे,अनिल पालीवाल, नन्द कुमार तिवारी, उपेन्द्र चौबे, जोडीराम यादव, राजेश पालीवाल,राजेश तिवारी,राजेश पालीवाल, अमित,सुमित पालीवाल उपस्थित रहे।
Previous Post Next Post