सड़कों पर दिखने लगे तांगा-साइकिल रिक्शा

सड़कों पर दिखने लगे तांगा-साइकिल रिक्शा

ऑटो बंद होने से छात्रों और मरीजों को करना पड़ रहा परेशानी का सामना


सिहोरा

एक जमाना था जब रेलवे स्टेशन खितौला एवं सिहोरा के बीच लगभग एक दर्जन से अधिक तांगे दौड़ते दिखायी देते थे, लेकिन समय बदला और तांगे की जगह आटो ने ले ली। इस कारण तांगे को सवारी मिलना मुश्किल हो गया और तांगे की रफ्तार के साथ साथ तांगे वालों की जिंदगी पर ब्रेक लग गया। उनके सामने मुश्किल ये थी कि कैसे अपना और घोड़े का पेट भरे अधिकांश तांगेवालों ने अपना पैतृक व्यवसाय बदलकर या तो शादी विवाह के आर्डर लेना शुरू कर दिये या कोई दूसरा व्यवसाय चुन लिया, लेकिन इतिहास ने फिर अपने आप को दोहराया और कोर्ट के आदेश के बाद नगर में चल रहे अधिकांश ऑटो बंद हो गए।

अवैध ऑटो के खिलाफ लगी थी याचिका

 2013 में अवैध ऑटो रिक्शा के संचालन के विरुद्ध लगाई गई पिटिशन के बाद हाईकोर्ट की सख्त हिदायत से जागे परिवहन विभाग ने सड़कों पर धमाचौकड़ी मचा रहे अवैध ऑटो के संचालन विरुद्ध चलाए रहे अभियान के तहत बहुत से ऑटो को जप्त कर थाने में खड़ा करवा दिया।जिससे सिहोरा खितौला में ऑटो संचालन लगभग बंद हो गया

तांगा- रिक्शा ने पुराने जमाने की याद दिला दी

ऑटो के संचालन पर ब्रेक लगने के कारण अनेक तांगा संचालकों ने अनेक वर्षों से घर में रखे तांगा को एक बार फिर सड़कों पर दौड़ाना शुरु कर दिया। जिससे लोगों को पुराने परंपरागत सवारी वाहन की याद भी ताजा कर दी। 60 साल से तांगा चला रहे जाफर भाई बताते है की उनके यहाँ चार पांच तांगे और हैं, जो खोलकर रख दिए थे, लेकिन अब जल्द भी उनको भी कसकर सड़क पर दौड़ाएंगे। तांगा से पहले रोज 300-400 रुपए मिल जाता था। उससे घर का खर्च भी निकल जाता और घोड़े के खाने का भी निकल जाता, लेकिन ऑटो रिक्शा की मार के चलते घोड़े को भी आधा पेट खाना नसीब नहीं हो पाता था। अब जबकि सड़कों से ऑटो रिक्शा गायब हो गए हैं तो तांगा चलाने वालों को फिर सवारियां मिलने लगी है।

छात्रों-मरीजों की परेशानी कौन समझेगा ?

सिहोरा में आटो संचालन बंद होने से स्कूलए-कालेज जाने वाले छात्रा छात्राओं के अलावा अस्पताल जाने वाले मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है,  साथ ही आटो चालक भी अब बेरोजगार हो गये है। इनके परिवार का भरण पोषण कैसे होगा इसका जबाव शायद किसी के पास नहीं है। इनके साथ साथ आम लोगों को आटो बंद होने से हो रही परेशानियों को भी समझना चाहिए ।

"मेट्रो बस की मांग ने जोर पकड़ा..

सैकड़ों लोगों की परेशानी को देखते हुए सिहोरा खितौला के बीच मेट्रो बस चलाने की मांग छात्र छात्राओं के अलावा प्रतिदिन ट्रेन से जबलपुर कटनी "अपडाउन करने वाले लोगों ने तहसील, जिला प्रशासन से की है।
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