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भगवान श्रीकृष्ण ने पहले इन्द्र का घमंड तोड़ा,बाद में क्षमा किया

भगवान श्रीकृष्ण ने पहले इन्द्र का घमंड तोड़ा,बाद में क्षमा किया
 
सिहोरा

 बड़खेरा हनुमान मंदिर के में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में बुधवार को  बाल विदुषी नीलम मिश्रा ने भगवान श्री कृष्ण के बालस्वरूप की बाल लीला कथा का रसपान कराते हुए  अवतार प्रसंग पर चर्चा में ब्रज में नंदोत्सव, नंद-वासुदेव संवाद, पूतना वध कथा, लीलावत उद्धार कथा, बकासुर, अघासुर, केंसी उद्धार कथा, ब्रह्माजी द्वारा बछड़ों सहित गोपों को एक वर्ष तक ब्रह्मालोक में छिपाकर रखना व ब्रह्माजी द्वारा स्तुति करना, लीला प्रसंग, भगवान कृष्ण द्वारा कंस वध, शरद ऋतु वर्णन, गोपियों द्वारा काíतक मास में कृष्ण प्राप्ति के लिए व्रत कथा, भगवान द्वारा वेणु गीत वादन, गोपियों के वस्त्र हरण लीला, यज्ञ पत्नियों पर अपनी कृपा करना, ब्रज में इंद्र की पूजा बंद कराकर भगवान गोवर्धन  की पूजा प्रारंभ करना, एक रूप में कृष्ण व दूसरे रूप में गोवर्धन बनकर पूजन कराना, ब्रज में मूसलधार बारिश करके ब्रज को जलमग्न करने की चेष्टा करना, भगवान द्वारा गोवर्धन पर्वत को ब्रज वासियों की रक्षार्थ कनिष्ठिका उंगली पर धारण कर सभी गोप गोपियों की रक्षा करना सहित अन्य प्रसंग को सुनाया।कथव्यास नीलम मिश्रा  ने बताया कि भगवान ने गोवर्धन पर्वत को 7 वर्ष की आयु में 7 दिन व रात अपनी उंगली पर धारण किया। इंद्र को जब अपने अपराध के बारे में ज्ञात हुआ तब इंद्र स्तुति करने ब्रज में आते हैं। भगवान कृष्ण इंद्र को क्षमा कर देते हैं। भगवान ने इंद्र को इसलिए क्षमा किया कि उन्होंने सभी गोप गोपियों को भगवान का सानिध्य प्रदान करवाया था। भक्तों ने भगवान के बालस्वरूप की   आरती की।