सालों से उपेक्षा का दंश झेल रहा मझौली का मस्तराम चौहान बस स्टैंड

सालों से उपेक्षा का दंश झेल रहा मझौली का मस्तराम चौहान बस स्टैंड

15 साल पहले हुआ था निर्माण : 13 लाख रुपए खर्च होने के बाद पूरी बिल्डिंग दुर्दशाग्रस्त, हर तरफ फैली गंदगी, आज तक शुरू नहीं हो पाया बसों का संचालन

मझौली
मझौली तहसील में वर्ष 2006 में स्वर्गीय मस्तराम चौहान बस स्टैंड का निर्माण कराया गया था। रामसेवक चौहान और विजय चौहान द्वारा लगभग 25 डिसमिल भूमि नगर परिषद को दान में दी गई थी। जिससे कि मझौली में बस स्टैंड का निर्माण हो सके एवं बसों का संचालन सुचारू रूप से हो। दान में दी गई इस भूमि पर बस स्टैंड तो बना और जनता की मेहनत की कमाई के 13 लाख रुपए भी खर्च किए गए लेकिन निर्माण होने के बाद बस ऑपरेटरों की मनमानी के कारण और शासन प्रशासन के सुस्त रवैए की वजह से आज भी बस स्टैंडसे बसों का संचालन नहीं हो रहा है। 

बिल्डिंग में पड़ गई दरारें, जर्जर अवस्था में भवन
करीब 13 लाखों रुपए खर्च होने के बाद बस बस स्टैंड के लिए बनाई गई बिल्डिंग दुर्दशा ग्रस्त हो चुकी है। चारों तरफ दीवारों का प्लास्टर उखड़ गया है। बस स्टैंड में बनाया गया प्रतीक्षालय शराबियों के लिए शराब का अड्डा बन गया है। जिसके चारों ओर शराब की बोतलें पानी के पाउच आए दिन देखे जा सकते हैं। गंदगी का अंबार लगा हुआ है।

सिर्फ आश्वासन, आज तक नहीं हो सका बसों का संचालन शुरू

स्थानीय दुकानदार सतीश चौरसिया शकील भाई जान लाला सोनी दिनेश कांत चौबे मुन्ना भाई जान का कहना है कि बस स्टैंड से बसों का संचालन शुरू कराया जाए। कई बार उन्होंने अधिकारियों को मौके एवं लिखित रूप से आवेदन दिया कि बस स्टैंड से बसों का संचालन किया जाए, जिससे कि रोजगार में बढ़ोतरी होगी। परंतु दुकानदारों को केवल उच्च अधिकारियों के द्वारा आश्वासन ही मिलता है आज  तक यहां से बसों का संचालन नियमित रूप से शुरू नहीं हो सका। बस स्टैंड के निर्माण में जनता की गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल हुआ लेकिन वह आज खंडहर में तब्दील हो गया है।
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