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खरीदी केंद्रों में किसानों से धान की तौल और लोडिंग-अनलोडिंग का मांगा जा रहा खुलेआम पैसा

खरीदी केंद्रों में किसानों से धान की तौल और लोडिंग-अनलोडिंग का मांगा जा रहा खुलेआम पैसा


धान उपार्जन की तिथि 30 जनवरी तक बढ़ाई जाए, भारतीय किसान यूनियन ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

सिहोरा

खरीदी केंद्रों में किसानों से धान की तौल और लोडिंग अनलोडिंग का अवैध पैसा मांगा जा रहा है। अधिकांश खरीदी केंद्रों में अत्यधिक अवस्थाएं हैं, जिसमें शासन की ओर से भी उन समस्याओं का निदान नहीं किया गया। जबकि निरंतर किसान संगठन शासन को खरीदी केंद्रों में चल रही अव्यवस्थाओं को लेकर अवगत कराते रहें। लेकिन शासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। जिसके कारण किसान लगातार परेशान हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में धान उपार्जन की तिथि 30 जनवरी 2022 तक बढ़ाई जाए। यह मांग भारतीय किसान यूनियन ने सोमवार को मुख्यमंत्री के नाम सिहोरा एसडीएम आशीष पांडे को ज्ञापन सौंपते हुए की।

भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष रमेश पटेल के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने ज्ञापन में बताया कि समय से खरीदी प्रारंभ नहीं होने और बारदाने की अनुपलब्धता के चलते खरीदी का काम लगातार धीमी गति से चलता रहा। बीच-बीच में समय-समय पर धान की तौल का काम बंद होने और परिवहन न होने के कारण खरीदी केंद्र में किसान परेशान होते रहे। 

एक अधिकारी पास करता है उपज दूसरा फेल

भारतीय किसान यूनियन के सदस्य श्रीकांत पाठक, अखिलेश शारदानंद पटेल, अवसर पटेल, सतीश दुबे, घनश्याम दुबे, आशीष पटेल, चंदू पटेल ने आरोप लगाया कि खरीदी केंद्रों में किसानों से अवैधानिक तरीके से धान की तौल लोडिंग अनलोडिंग की राशि मांगी जाती है। एक अधिकारी द्वारा धान पास की जाती है तो दूसरा अधिकारी उसे फेल कर देता है। एसएमएस की अवधि में बारदाना मौसम के कारण कॉल ना हो पाने से खरीदी अधूरी रह गई। जिससे पुनः एमएमस नहीं आ रहे। 15 जनवरी की अवधि समाप्त होने की कगार पर हैं, जिसे बढ़ाकर 30 जनवरी तक किया जाए।

लगातार हो रही बारिश से किसान परेशान

किसान शिव कुमार पटेल अशोक पटेल गुलाब पटेल विश्वेश्वर पटेल और राजा भैया पटेल ने बताया कि लगातार हो रही बारिश के कारण खरीदी केंद्रों में किसानों की धान भीग गई है। ऐसे में किसान हैरान और परेशान हैं शासन और प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। खरीदी केंद्रों पर बिचौलिए खुलेआम किसानों से ओन-पौन दामों पर धान खरीदी के लिए खड़े हुए हैं। यदि किसान की धान सरकारी खरीदी केंद्रों में नहीं बिकती तो मजबूरी में किसान को अपनी धान इन बिचौलियों को देने मजबूर होना पड़ेगा।