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"सिहोरा ज़िला आमजन की भावना इसके साथ न खेले भाजपा'

"सिहोरा ज़िला आमजन की भावना इसके साथ न खेले भाजपा' 

पत्रकार वार्ता में कांग्रेस ने लगाया भाजपा विधायक और सरकार पर आरोप

बोले विधायक ने किया सिहोरा वासियों का अपमान

सिहोरा

सिहोरा में चल रहे लक्ष्य ज़िला आंदोलन को लेकर अब राजनीति गरमा गई है। बीते दिनों सिहोरा रेस्ट हाऊस में भाजपा विधायक नंदनी मरावी के दिए गए विवादित बयान के बाद अब कांग्रेस ने शनिवार को प्रेसवार्ता की । जिसमें कांग्रेस का कहना है कि सिहोरा विधायक  मरावी ने जो सिहोरा ज़िला न बनाने की ओर सिहोरा को आवश्यकता न होने की बात कही है यह अत्यंत दुर्भाग्य पूर्ण एवम दुःखद है। हम सिहोरा विधायक मरावी के गैर जिम्मेदाराना बयान की निंदा करते है,और बीजेपी स्पष्ट करे कि वह ज़िला सिहोरा के साथ में है या विरोध में है..... अब "ज़िला नहीं तो वोट नहीं"का नारा ही सिहोरा में चलेगा।

कांग्रेस ने उठाई थी सबसे पहले सिहोरा जिला की मांग

सर्वप्रथम सिहोरा जिले की मांग 1987 में कांग्रेस से ही उठी थी। जब कटनी को जिला बनाया जाना था। फिर दुबारा 1996 में सिहोरा विकास संघर्ष समिति के द्वारा पुनः मांग उठाई गई, फिर सन 2000 में संयुक्त अभियान समिति द्वारा पुनः आंदोलन प्रारंभ किया गया, जो कि 4 नवंबर 2000 पर लाठीचार्ज होने के साथ समाप्त हुआ, लेकिन उस समय के तत्कालीन कांग्रेसी विधायक नित्य निरंजन खंपरिया की सक्रियता से सिहोरा जिले का प्रारूप बना और दावा आपत्ति निराकरण के साथ मप्र शासन के राजपत्र में प्रथम अधिसूचना जारी हुई।


कांग्रेस पार्टी जिले की लड़ाई लड़ती रहेगी

 यह सिहोरा का दुर्भाग्य रहा और बीजेपी की घटिया राजनीति का शिकार सिहोरा हुआ है।  कांग्रेस पार्टी सिहोरा जिले की लड़ाई लड़ती रहेगी। पत्रकार वार्ता में राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि अमोल चौरसिया, कांग्रेस सेवादल जिला ग्रामीण अध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव, रुकमणी गोटिया, प्रकाश कुररिया, प्रदेश सचिव पीसीसी बाबा कुरेशी, बिहारी पटेल, मंजू मिश्रा, घनश्याम बड़गैया, गिरधर सरावगी, आलोक पांडे गणेश दहिया राजेश पटेल रामलोचन शंकर वंशकार के साथ कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।