पुलिस के पहरे में थाने से किसानों को बंटे बारदाने

पुलिस के पहरे में थाने से किसानों को बंटे बारदाने

मझगवां क्षेत्र के बंदरकोला वेयर हाउस खरीदी केंद्र में बारदाना नहीं पहुंचने से परेशान थे किसान, एक ट्रक बारदाना पहुंचा था मझगवां सोसायटी सोसाइटी के वितरण के लिए

सिहोरा

समर्थन मूल्य धान की सरकारी खरीद में बाढ़ आने की समस्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में किसान कड़कड़ाती में बारदाना के इंतजार में अपनी उपज की तकवारी करने के लिए मजबूर। ताजा मामला मझगवां क्षेत्र के बंदरकोला ओपन कैप का है, जहां मझगवां सोसाइटी के किसान बारदाना नहीं मिलने से परेशान थे। शुक्रवार को बारदाना पहुंचा तो जरूर, लेकिन बारदाने की मारामारी के चलते प्रशासन ने निर्णय लिया कि किसानों को थाना परिसर से पुलिस की मौजूदगी में बाटा जाए। संबंधित सोसाइटी के किसानों को मझगवां थाना परिसर में पुलिस के पहरे के बीच बारदाने बांटे गए।



थाने के अंदर किसानों की लग गई भारी भीड़

मालूम रहे कि मझगवां सोसाइटी में पिछले एक सप्ताह से बारदाना नहीं पहुंचने के कारण खरीदी का काम पूरी तरह बंद था। ऐसे में किसानों की तौल नही हो रही थी। जिसको लेकर किसानों में भारी आक्रोश देख रहा था। किसान प्रशासन को और संबंधित विभाग के अधिकारियों को जमकर कोस रहे थे। बारदाना लेने के लिए भारी संख्या में किसानों की भीड़ थाना परिसर में जमा हो गई।

पुलिस ने बंटवाए किसानों को बारदाने

टीआई अनिल लाल सरेआम की मौजूदगी में पुलिसकर्मियों ने लिस्ट के आधार पर देर शाम किसानों को बारदाने वितरित किए। करीब एक ट्रक बारदाना संबंधित सोसाइटी के किसानों को वितरण के लिए आया था।


बारदाना का संकट, खुले में पड़ी उपज
बेपरवाह बने अधिकारी


सिहोरा तहसील के अंतर्गत स्थित उपार्जन केंद्र गांधीग्राम खरीदी केंद्र क्रमांक एक एंव बेला के दोनो खरीदी केंद्र में लंबे समय से बारदाना का अभाव बना हुआ है। जिस कारण किसानों की खुले आसमान के नीचे उपज पड़ी हुई है। वहीं दूसरी ओर बिगड़ते मौसम के कारण किसानों की चिंताएं और भी बढ़ चुकी हैं। किसानों के मैसेज की डेट एक्सपायर हो गई बारदाना न होने के कारण किसान खेती किसानी का काम छोड़कर खरीदी स्थलों के चक्कर लगा रहा है। किसानों द्वारा संबंधित अधिकारियों को बताया जा रहा है। उसके बावजूद भी उपार्जन व्यवस्था से जुड़े अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं।  ज्ञात हो की अभी तक लगभग 40 फ़ीसदी किसानों की धान की तुलाई बाकी है, परंतु बारदाने के अभाव के कारण किसान दर-दर की ठोकर खा रहा हैं।
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