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आपको कोविड-19 दूसरी लहर तो याद ही होगी। उस लहर के दौरान जबलपुर सांसद राकेश सिंह ने सिहोरा सिविल हॉस्पिटल को सांसद निधि से एंबुलेंस उपलब्ध कराई थी।

आपको कोविड-19 दूसरी लहर तो याद ही होगी। उस लहर के दौरान जबलपुर सांसद राकेश सिंह ने सिहोरा सिविल हॉस्पिटल को सांसद निधि से एंबुलेंस उपलब्ध कराई थी। अस्पताल को नई चमचमाती एंबुलेंस तो मिल गई लेकिन अस्पताल प्रबंधन इस नई एंबुलेंस का उपयोगी नहीं कर पाया, क्योंकि इस नई एंबुलेंस का न ही रजिस्ट्रेशन था न ही बीमा। एंबुलेंस अस्पताल के स्टैंड में साल भर धूल खाती रही।
असमंजस में खड़ी रही एंबुलेंस कौन कराए रजिस्ट्रेशन

जानकारी के मुताबिक अस्पताल के स्टैंड में खड़ी एंबुलेंस धूल खाती रही। जबकि कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान गंभीर मरीजों को अस्पताल से जबलपुर ले जाना सबसे बड़ी समस्या थी। ऐसे में इस एंबुलेंस का सही मायने में उपयोग हो सकता था लेकिन एंबुलेंस का रजिस्ट्रेशन आखिर कौन करवाए इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। 



निजी एंबुलेंस के संचालकों ने उठाया मनमाना फायदा

दान में मिली एंबुलेंस का आरटीओ इंश्योरेंस सहित अन्य व्यवस्थाएं पूरी नहीं होने का फायदा निजी एंबुलेंस के संचालकों ने जमकर उठाया। मरीजों को जबलपुर रेफर करने और वहां पर अस्पताल से पहले से सेटिंग कर मरीजों को जमकर लूटा जाता है। 
साल भर से खड़ी थी एंबुलेंस जिम्मेदार अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान ?

जिम्मेदार अधिकारियों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया कि दान में मिली इस एंबुलेंस का कितना जल्द से जल्द सदुपयोग किया जा सके। करीब साल भर बाद विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुली और उन्होंने दो दिन पहले ही एंबुलेंस का  इंश्योरेंस करवा लिया वही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है।