Ticker

6/recent/ticker-posts

फर्जी डॉक्टर के क्लीनिक पर कार्रवाई में आखिर क्यों हो रही देरी ?

फर्जी डॉक्टर के क्लीनिक पर कार्रवाई में आखिर क्यों हो रही देरी ?
खितौला स्थित डॉ जी सी मोटवानी के क्लीनिक का मामला : जांच प्रतिवेदन में अधिकारियों को नहीं मिले कोई भी वैध दस्तावेज, छापामार कार्रवाई के बाद आनन-फानन में लगे दो डॉक्टरों के नाम के बोर्ड 

सिहोरा

स्वास्थ्य विभाग के अमले द्वारा खितौला बाजार स्थित डॉ डीसी मोटवानी के क्लीनिक में हुई कार्रवाई के बाद यह बात सामने आई है कि संबंधित चिकित्सक के पास मरीजों की जांच पैथोलॉजी और ड्रग का कोई भी लाइसेंस नहीं है। कार्रवाई हुए पांच दिन से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासनिक अमला न जाने क्यों डॉक्टर की क्लीनिक को सील करने में आनाकानी क्यों कर रहा है ? जबकि विभागीय अधिकारियों ने अपना जांच प्रतिवेदन मुख्य चिकित्सा अधिकारी और सिहोरा एसडीएम को भेज दिया है।

 ये है पूरा मामला 

मालूम रहे कि 6 फरवरी को ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ दीपक गायकवाड और सिहोरा सिविल हॉस्पिटल के प्रभारी डॉ आर्यन तिवारी ने खितौला बाजार स्थित डॉ जी सी मोटवानी के क्लीनिक पर छापा मारा था। छापे की कार्रवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पाया कि संबंधित क्लीनिक में मरीजों की बकायदा जांच हो रही थी पैथोलॉजी संचालित हो रही थी और अंग्रेजी दवाइयां मरीजों को दी जा रही थी। स्वास्थ्य विभाग के अमले को संबंधित चिकित्सक द्वारा कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं किए गए।


जांच प्रतिवेदन में फर्जी पाया गया क्लिनिक 

बीएमओ डॉ दीपक गायकवाड ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जबलपुर और एसडीएम सिहोरा को जो जांच प्रतिवेदन भेजा उसमें साफ साफ कहा गया है कि क्लीनिक पूरी तरीके से फर्जी है और डॉक्टर झोलाछाप है। इनके पास डॉक्टरी से संबंधित कोई भी दस्तावेज नहीं है। 


कार्रवाई के बाद क्लीनिक में लग गए दो डाक्टरों के बोर्ड

झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई का कोई भी असर देखने को नहीं मिल रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कार्रवाई के बाद ही संबंधित चिकित्सक के क्लीनिक में दो एमबीबीएस डॉक्टरों के बोर्ड लगा दिए गए। जो साफ-साफ दर्शाता है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन का इनको कोई डर नहीं है। 

सिहोरा-खितौला में चल रहे कई फर्जी क्लीनिक और दवाखाने

स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की हिलाहवाली और ढुलमुल रवैया के चलते पिछले डेढ़ साल के अंदर खितौला और सिहोरा में एक दर्जन से अधिक फर्जी दवाखाने और क्लीनिक चल रहे। दवाखाना और क्लीनिक में संबंधित चिकित्सक के बोर्ड तो लगा दिए जाते हैं लेकिन वे यहां झांकने तक नहीं आते। जो डॉक्टर आते हैं वह किसी दूसरी विधि के हैं लेकिन मरीजों की जांच किसी दूसरी विधि की कर रहे हैं।


क्या कहते हैं जिम्मेदार

डॉ जी सी मोटवानी के क्लीनिक में पांच फरवरी को जांच की गई थी जांच के दौरान संबंधित डॉक्टर कोई भी वैध दस्तावेज मौके पर नहीं दिखा पाए। उनको दो दिन का समय दिया गया था कि वह अपने वैध दस्तावेज पेश करें। उनके द्वारा जो दो डॉक्टरों के नाम और उनकी डिग्री लगाई गई है वह मौके पर मिले ही नहीं। पूरी चीजें यह बताती है कि उनका दवाखाना फर्जी है और डॉक्टर भी। जांच प्रतिवेदन एसडीएम सिहोरा और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भेज दिया गया है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी।


डॉक्टर दीपक गायकवाड, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर सिहोरा