लाइन में पहले लगने को लेकर किसानों के बीच जमकर चले लात घूंसे, मच गया हंगामा

लाइन में पहले लगने को लेकर किसानों के बीच जमकर चले लात घूंसे, मच गया हंगामा
सिहोरा स्थित मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के गोदाम का मामला

पिछले एक माह से बनी अराजक स्थिति, प्रशासन बना मूकदर्शक

सिहोरा

किसानों के बीच खाद को लेकर किस तरह मारामारी मची है इसका जीता जागता नमूना बुधवार को सिहोरा के मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के गोदाम में देखने को मिला। जहां पहले लाइन में लगने की बात को लेकर दो किसानों के बीच बात तो शुरू हुई कहासुनी से, जो देखते देखते लात-घूसों में बदल गई। दोनों किसानों ने एक दूसरे पर जमकर लात घूंसे बरसाए। मामला बढ़ने पर लाइन में लगे अन्य किसानों ने दोनों किसानों को किसी तरह अलग करा कर मामला शांत कराया। 


खाद को लेकर यह स्थिति सिहोरा में पिछले एक माह से बनी हुई है। रबी सीजन में किसान को गेहूं की बोवनी के बाद यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन डबल लाख के गोदाम में आए दिन यूरिया खत्म होने के कारण किसानों की लंबी लाइन यूरिया के लिए लग जाती है। यूरिया के संकट का फायदा बिचौलियों उठाते हैं और मुंह मांगे दामों पर किसानों को बेचकर लंबा मुनाफा कमा रहे हैं।
प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी नहीं आते झांकने

किसानों को इस समय एक एक बोरी यूरिया की पड़ी। गेहूं की बोवनी के बाद फसल की बढ़ोतरी के लिए यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत किसानों को है।  ऐसे में किसान यूरिया के लिए सहकारी समितियों के अलावा मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के गोदामों पर आश्रित है। लेकिन यहां भी किसानों को सिर्फ निराशा ही हाथ लगती है सुबह से लाइन में लगने के बावजूद सिर्फ टोकन हाथ में थमा दिया जाता है और कह दिया जाता है कि आज नहीं 3 दिन बाद आना। 3 दिन बाद जब किसान गोदाम पहुंचता है तो उसे यह कह दिया जाता है कि यूरिया का स्टॉक खत्म हो गया है ऐसे में करें तो आखिर क्या करे किसान। प्रशासन का इस ओर कोई भी ध्यान नहीं है वह सिर्फ मूकदर्शक बना हुआ है।


व्यापारी मुंह मांगे दामों पर बेच रहे यूरिया, कमा रहे मोटा मुनाफा

एक तरफ किसानों को एक-एक बोरी यूरिया के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता है वह भी अगर मिल जाए तो गनीमत। वही व्यापारी मुंह मांगे दामों पर यूरिया को ब्लैक में बेच रहे हैं। सरकारी रेट की बात की जाए तो यूरिया की कीमत ₹267 है लेकिन व्यापारी 300 से 400 रुपया में खुलेआम यूरिया बेच रहे हैं। शासन के स्पष्ट निर्देश है कि तय कीमत से कोई भी ज्यादा यूरिया बेच नहीं सकता ऐसे व्यापारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। लेकिन सिहोरा में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को इतनी फुर्सत ही नहीं है कि व्यापारियों की दुकानों का स्टॉक चेक किया जाए और वह यूरिया किस रेट में बेच रहे हैं इसकी जानकारी लें।
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