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सिहोरा की राजनैतिक उपेक्षा अब बर्दाश्त नही होगी

सिहोरा की राजनैतिक उपेक्षा अब बर्दाश्त नही होगी
जिला बनने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प
लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति का इक्कीसवां धरना
सिहोरा

 कभी एशिया की सबसे बड़ी तहसील होने का गौरव रखने वाली सिहोरा तहसील लगातार टूट टूट कर एक छोटी सी ग्राम पंचायत के समान तहसील बनकर रह गई।दूसरे क्षेत्र विकास के हकदार थे उनका विकास हुआ पर सिहोरा की हमेशा राजनैतिक उपेक्षा की गई।इस उपेक्षा से सिहोरा के सम्मान को जो ठेस पहुँची है उसकी पूर्ति उसके ओहदे में वृद्धि कर जिला बनाने से ही पूर्ण की जा सकती है।सिहोरा जिला धरने में अधिवक्ता संघ सिहोरा ने समर्थन करते हुए भारी संख्या में धरने में शामिल हुआ।
         उक्त बातें लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति सिहोरा द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के इक्कीसवें रविवार आंदोलनकारियों द्वारा रखी गई।आंदोलनकारियों ने अपने उद्बोधनों में सत्तारूढ़ सरकार को इस उपेक्षा के लिए दोषी करार देते हुए आरोप लगाया कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों ने कभी सिहोरा को उसका वास्तविक सम्मान दिलाने का सार्थक प्रयास नही किया।अब जबकि आमजन उनसे अपेक्षा रख रहे है उनकी बेरुखी अक्षम्य है।

श्रीराम यज्ञ में जुटाएंगे समर्थन

लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति सिहोरा के विकास दुबे,सियोल जैन और अधिवक्ता संघ के सचिव संजय सिंह सेंगर ने घोषणा की कि आगामी 1 मार्च से सिहोरा में शुरू हो रहे श्रीराम महायज्ञ में आसपास के ग्रामीणजनों का आना होगा।समिति के सदस्य परमश्रद्धेय गुरुजी और लोगों के बीच पर्चे वितरण कर सिहोरा जिले को जनांदोलन बनाने का जोर लगाएँगे।
       सिहोरा जिले के धरने में अनिल जैन,नागेंद्र क़ुररिया,मानस तिवारी,उमेश तिवारी,विमलेश जैन,आशीष व्योहार,राकेश ठाकुर,अभिषेक पाठक,मानस तिवारी,रामलाल साहू,अमित बक्शी,नागेश उपाध्याय,अजय किशोर तिवारी,सुशील जैन,सुनील पटेल,रामजी शुक्ला,राजेश साहू,नन्हे भैया पटेल,मनोज दुबे,आनंद पटेल,हरिओम यादव,संत कुमार पटेल,हरिओम यादव,सौरभ साहू,अभिशंकर मिश्रा,यशस्वी ठाकुर,लकी सेन, सहित अनेक सिहोरावासी मौजूद रहे।