एसडीएम सिहोरा ने चार बहनों को दिलाया पिता की भूमि पर उनका हक

एसडीएम सिहोरा ने चार बहनों को दिलाया पिता की भूमि पर उनका हक
पौत्र ने वसीयत नामे के आधार पर करा लिया था अपना नाम दर्ज 

सिहोरा

 एसडीएम सिहोरा आशीष पाण्डे ने अपने न्यायालय में दर्ज हुये अपील के एक प्रकरण में चार बहनों सहित सभी विधिक वारिसानों को स्वर्गीय पिता की भूमि पर उनका हिस्सा दिलवाकर पहली पेशी में ही न्याय दिलाने की एक ओर मिशाल पेश की है। इस प्रकरण में पूर्व में तहसीलदार न्यायालय द्वारा सभी वारिसानों के नाम दर्ज करने का आदेश पारित किया गया था। लेकिन बाद में वसीयत नामे के आधार पर पौत्र द्वारा षडयंत्र पूर्वक राजस्व रिकार्ड से सभी वारिसानों के नाम विलोपित करा कर केवल अपना नाम दर्ज करा लिया गया।
 एसडीएम सिहोरा आशीष पाण्डे ने प्रकरण के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि ग्राम रजगंवा तहसील सिहोरा निवासी रामचरण बागरी का 7 अगस्त 2021 में निधन हो गया था। रामचरण की मृत्यु के बाद उनकी करीब 1.41 हेक्टेयर भूमि पर फौती उठाने का उनके वारिसानों पुत्र मनरमन सिंह एवं राजकुमार तथा पुत्री विद्याबाई, विन्ध्यवती बाई, सुधाबाई एवं लवकेश बाई ने फौती उठवाने तहसीलदार न्यायालय से आवेदन प्रस्तुत किया था। तहसीलदार न्यायालय द्वारा इश्तकार प्रकाशन और पटवारी की जांच रिपोर्ट जैसी तमाम औपचारिकताये पूरी हो जाने पर स्व. रामचरण की भूमि पर 9 नवम्बर 2021 को इन वारिसानों के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किये गये थे। 
 एसडीएम आशीष पाण्डे ने बताया कि बाद में स्व. रामचरण के पौत्र अनुरूद्ध बागरी पिता मनमरन सिंह बागरी ने एक वसीयतनामे के आधार पर इस भूमि पर अपना नाम दर्ज कराने हेतु आवेदन पत्र तहसीलदार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया तथा वारिसानों को सूचना दिये बिना चुपचाप तथा चोरी छिपे राजस्व रिकार्ड से उनके नाम विलोपित कराकर अपना नाम दर्ज करा लिया। उन्होने बताया कि तहसीलदार न्यायालय के इसी विवादित आदेश के विरूद्ध सभी छह वारिसानों द्वारा एसडीएम न्यायालय में अपील प्रस्तुत की गई थी। 
 श्री पाण्डे ने बताया कि अपील के इस प्रकरण में सभी पक्षकारों को पेशी पर बुलाकर सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि सुनवाई और मूल प्रकरण के अध्ययन के बाद यह पाया गया कि एक बार नामांतरण आदेश पारित करने के बाद तहसीलदार न्यायालय को दोबारा उसी भूमि पर नामांतरण आदेश पारित करने का कोई अधिकार नहीं था। एसडीएम सिहोरा ने बताया कि पहली पेशी में ही तहसीलदार न्यायालय द्वारा अनुरूद्ध बागरी का नाम राजस्व रिकार्ड में दर्ज करने के आदेश को निरस्त कर स्व. रामचरण बागरी की भूमि पर पुत्रियों सहित सभी छह विधिक वारिसानों के नाम दर्ज करने का आदेश पारित किया गया और उन्हे आदेश की प्रति भी सौंपी गई।
Previous Post Next Post