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श्रीराम महायज्ञ में 300 से अधिक बटुक ब्राह्मणों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार

श्रीराम महायज्ञ में 300 से अधिक बटुक ब्राह्मणों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार

श्रीराम महायज्ञ आयोजन समिति द्वारा विद्वान आचार्य द्वारा विधि विधान से कराया गया यज्ञोपवीत संस्कार


श्रीश्री 1008 श्री बाल संत स्वामी सीता शरण जी महाराज बटुकओं के साथ स्वयं बैठ किया पूजन




सिहोरा


श्री शिव मंदिर बाबा ताल सिहोरा में श्रीराम महायज्ञ जिसका आयोजन 1 मार्च से 10 मार्च तक सिहोरा में होना है के पूर्व मंगलवार को यज्ञस्थल में 300 से अधिक बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराया गया।प्रातः 4 बजे से प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में बटुकों के परिजनों सहित हजारों की संख्या में सिहोरा और आसपास के भक्तगण सम्मिलित हुए।

श्रीराम महायज्ञ आयोजन समिति द्वारा ब्राह्मण बटुकों के इस संस्कार को विद्वान आचार्यो द्वारा विधि विधान से पूर्ण कराया गया। श्री 1008 श्री बाल संत स्वामी सीता शरण जी महाराज के सानिध्य में हुए इस संस्कार में गुरुजी ने स्वयं बटुकों के साथ बैठ पूजन किया और अठबम्हणा भोजन में बटुकों को स्वयं अपने हाथों से भोजन परोसा।स्नान के बाद बटुकों को नए वस्त्र भी गुरुजी ने ही अपने हाथों से पहनाया।
    
क्या होता है उपनयन संस्कार

उपनयन संस्कार जिसमें जनेऊ पहना जाता है और विद्यारंभ होता है। मुंडन और पवित्र जल में स्नान भी इस संस्कार के अंग होते हैं। सूत से बना वह पवित्र धागा जिसे यज्ञोपवीतधारी व्यक्ति बाएँ कंधे के ऊपर तथा दाईं भुजा के नीचे पहनता है।
यज्ञोपवीत एक विशिष्ट सूत्र को विशेष विधि से ग्रन्थित करके बनाया जाता है। इसमें सात ग्रन्थियां लगायी जाती हैं। ब्राह्मणों के यज्ञोपवीत में ब्रह्मग्रंथि होती है। तीन सूत्रों वाले इस यज्ञोपवीत को गुरु दीक्षा के बाद हमेशा धारण किया जाता है। तीन सूत्र हिंदू त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक होते हैं। अपवित्र होने पर यज्ञोपवीत बदल लिया जाता है। बिना यज्ञोपवीत धारण किये अन्न जल गृहण नहीं किये जाने की मान्यता है।
क्या होती है जनेऊ की लंबाई

जनेऊ की लंबाई 96 अंगुल की होती है क्यूंकि जनेऊ धारण करने वाले को 64 कलाओं और 32 विद्याओं को सीखने का प्रयास करना चाहिए। 32 विद्याएं चार वेद, चार उपवेद, छह अंग, छह दर्शन, तीन सूत्रग्रंथ, नौ अरण्यक मिलाकर होती है। 64 कलाओं में वास्तु निर्माण, व्यंजन कला, चित्रकारी, साहित्य कला, दस्तकारी, भाषा, यंत्र निर्माण, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, दस्तकारी, आभूषण निर्माण, कृषि ज्ञान आदि आती हैं।