हिरन नदी के पुराने पुल की उपेक्षा, टूटी रेलिंग नदी में लटकी

हिरन नदी के पुराने पुल की उपेक्षा, टूटी रेलिंग नदी में लटकी 

घाटसिमरिया पुल का मामला : टूटी-फूटी रेलिंग पुल से नीचे गिरने का खतरा, एनएचएआई के अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान, कई गांव का है सीधे आवागमन


सिहोरा

जबलपुर-सिहोरा सड़क मार्ग पर नवनिर्मित  फोरलाइन सड़क मार्ग पर बड़े व नए पुलों से आवागमन होने के बाद पुराने पुलों की सम्बंधित विभाग लगातार उपेक्षा कर रहा है।  पुरानी राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 7  पर सिहोरा जबलपुर मार्ग पर बने हुए घाटसिमरिया के पुराने हिरन नदी का पुल  लगातार अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। एक वर्ष से अधिक समय से हिरन नदी के पुराने व जर्जर तथा टूटी हुई रेलिंग वाले पुल से आवागमन हो रहा है, परंतु पुराने पुल की टूटी हुई रेलिंग भयावह स्थिति खतरे का सबब बनी हुई है।  नदी के मुख्य सड़क के इस पुल की एक  ओर आधी रैलिंग लगभग एक वर्ष से गायब है व हिरन नदी की ओर झुकी हुई है।वहीं दूसरी ओर की टूटी फूटी हुई रैलिंग अनचाहे दुर्घटनाओं के लिए खतरे का सबब बनी हुई है।साथ ही पुल की सड़क भी कई स्थानों पर कटी फ़टी व गढ्ढे युक्त है, जबकि यात्री वाहनों,  आसपास के लगभग एक दर्जन गांवों के लोगों का दिन व रात्रि के  समय दो पहिया वाहन से जाना आना जारी है। चालक जब सड़क मार्ग पर जब इस पुल से गुजरते हैं तो इस अधूरी व टूटी फूटी रेलिंग  स्थल पर उन्हें पुल से नीचे  गिर जाने का अंदेशा बना रहता है।

कई ग्रामों का आवागमन

 हिरन नदी के इस पुल से ग्राम मोहतरा, मुस्कुरा,रिठौरी आदि ग्रामों के घाट सिमरिया के अनेक लोग पैदल वह साइकिल से आते हैं। लोगों का कहना है कि इस मार्ग से पुल पर लोहे की टूटी फूटी हुई रैलिंग तथा कई स्थानों पर रैलिंग न लगे होने से उन्हें निकलने में डर लगता है।सामने की ओर आ रहे वाहन की स्थिति में उन्हें पाइप का सहारा न होने पर पुल से नीचे करने का अंदेशा बना रहता है। इसके अलावा पुल से निकलने वाले पालतू पशु गाय, बैल, भैंस इत्यादि अनेक बार जिन स्थानों पर रेलिंग नहीं लगी है।वहां से गिरकर पुल के नीचे चले जाते है।कई बार पशु घायल व मृत हो चुके हैं । शासन प्रशासन से ग्राम वासियों की अपेक्षा है कि अधिकारी समस्या को दृष्टिगत रखते हुए पुल पर लोहे के पाइप की रेलिंग आवश्यक रूप से लगवाई जावे। जिससे अनचाही दुर्घटनाओं से बचा जा सके।




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