Ticker

6/recent/ticker-posts

पांच किलोमीटर दूर से स्कूल के बच्चों को ढोकर लाना पड़ता है पीने के लिए पानी

पांच किलोमीटर दूर से स्कूल के बच्चों को ढोकर लाना पड़ता है पीने के लिए पानी
यह है स्कूलों के हालात : दो विभागों के बीच पिस रहे प्राथमिक शाला घाट सिमरिया के छात्र- छात्राएं, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी जनपद शिक्षा केंद्र को दी हैंडपंप खराब होने की शिकायत, आज तक नहीं हुआ सुधार

सिहोरा 

 सिहोरा विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घाटसिरिया के प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को पीने का पानी पांच किलोमीटर दूर से ढोकर लाना पड़ता है। स्कूल में यह स्थिति करीब दो माह से है। स्कूली बच्चों के पीने के पानी के लिए हैंडपंप में लगा समर्सिबल करीब दो माह से जला पड़ा है। हैंड पंप में लगे समर्सिबल को सुधारने के लिए स्कूल के शिक्षकों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी उप संभाग सिहोरा और जनपद शिक्षा केंद्र के अधिकारियों को दो बार लिखित आवेदन भी दिया लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई। 

शासकीय प्राथमिक शाला घाट सिमरिया की प्रधान अध्यापक तस्लीम अख्तर खान ने बताया स्कूल के बच्चों के पीने के पानी के लिए ग्राम पंचायत और स्कूल प्रांगण में पहले हैंडपंप लगा था, लेकिन हैंडपंप के ऊपरी हिस्से को कोई चोरी करके ले गया। बाद में इस हैंडपंप में सबमर्सिबल लगा दिया गया था ताकि ग्राम के लोगों को और स्कूल के बच्चों को पीने का पानी मिल सके, लेकिन फरवरी माह की शुरुआत में हैंडपंप में लगा समर्सिबल जल गया।
पीएचई और जनपद शिक्षा केंद्र उपयंत्री एक दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी

सबमर्सिबल जलने के बाद इसके सुधार के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी उप खंड सिहोरा को सुधार के लिए 7 फरवरी 2022 स्कूल से पत्र लिखा, लेकिन विभाग के संबंधित इंजीनियर ने इस मामले को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई और आज की स्थिति में भी हैंडपंप में लगा सबमर्सिबल बंद पड़ा है।  सप्ताह भर बाद जनपद शिक्षा केंद्र के उपयंत्री को 12 फरवरी को इस संबंध में पत्र लिखा गया, लेकिन वहां के भी जिम्मेदार उपयंत्री ने टका सा जवाब दे दिया कि हैंडपंप पीएचई के अंडर में है हमारे अंडर में नहीं। 
स्कूल के 80 बच्चों के सामने पीने के पानी का संकट, पांच किलोमीटर दूर से ला रहे पानी

दोनों विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा एक दूसरे पर हैंडपंप सबमर्सिबल सुधार की जिम्मेदारी डाल दी गई, लेकिन सबसे बड़ी समस्या स्कूल में पहली से लेकर पढ़ने वाले पांचवी तक के उन 80 बच्चों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ी हुई है। स्थिति यह है कि बच्चों को पीने का पानी पांच किलोमीटर दूर से ढोकर लाना पड़ता है। लेकिन यह देखने वाला कोई नहीं है। मध्यान भोजन पकाने वाली महिलाओं के सामने भी यही समस्या है उन्हें भी खाना बनाने के लिए पानी ढोकर लाना पड़ता है।


क्या कहते हैं जिम्मेदार

स्कूल में लगे हैंड पंप की मोटर जलने और उसे बदलने की को लेकर यदि पत्र लिखा गया है तो इस में जल्द सुधार कार्य किया जाएगा। प्रयास रहेगा कि इसमें जल्द से जल्द सुधार हो और बच्चों के पीने के पानी के संकट को दूर किया जा सके।

विवेक कुमार शुक्ला, अनुविभागीय अधिकारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी उपखंड सिहोरा