Ticker

6/recent/ticker-posts

बजट में पुरानी पेंशन शामिल न होने से निराशा व आक्रोश व्याप्त

बजट में पुरानी पेंशन शामिल न होने से निराशा व आक्रोश व्याप्त     
सिहोरा

  सन् 2004 के पश्चात् नियुक्त शासकीय कर्मचारियों को तत्कालीन केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन बंद कर छलावा पूर्ण एनपीएस लागू की।जिसके अंतर्गत अभी तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 600/से लेकर अधिकतम 1300/तक मासिक पेंशन स्वयं के नियमानुसार कटौती किए गए जमा पैसे से प्राप्त हो रही।जिससे ऐसे शासकीय सेवानिवृत्त सेवकों को जीवनयापन के लिए मजदूरी करने तक की सूचनाएं हैं।मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष प्रेमनारायण तिवारी ने बताया कि राजस्थान व छत्तीसगढ़ सरकार ने पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर  ऐतिहासिक निर्णय लिया है,यही आशा व विश्वास मध्यप्रदेश की सरकार से था कि प्रदेश के कर्मचारियों को अन्य राज्यों के समान पुरानी पेंशन की घोषणा बजट मे होगी, ऐसा नहीं होने से शिक्षक व कर्मचारियों मे घोर निराशा व आक्रोश व्याप्त है।केंद्र के समान डीए, क्रमोन्नति तोहफा न होकर प्रदेश के कर्मचारियों का अधिकार है।यदि पुरानी पेंशन लागू होती तो निश्चित रूप से तोहफा होती।प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री को अविलंब प्रदेश में मूल पुरानी पेंशन लागू करने की मांग मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस ने की है।मांग करने वालों मे कोमल शुक्ला, बलराम बर्मन,अनिल खंपरिया, राकेश पटेल, विकास उपाध्याय, अश्विनी उपाध्याय, अशोक पटेल, ओपी मांझी, गोपाल कोल, ब्रजकिशोर गर्ग, विनोद पटेल, मनीष पटेल, महेंद्र पटेल, शिव पटेल, नारायण मिश्रा, रामनिरंजन दुबे, हरीश विश्वकर्मा, कार्तिका गुप्ता, मीनाक्षी तिवारी, एहसान मंसूरी आदि शामिल हैं।