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400 वर्ष पुरानी है अष्टधातु की रामजानकी मूर्तियों, भक्तों की मनोकामना होती है पूरी

400 वर्ष पुरानी है अष्टधातु की रामजानकी मूर्तियों, भक्तों की मनोकामना होती है पूरी

रामनवमी पर होता है विशेष आयोजन दूर-दूर से आते हैं दर्शन करने श्रद्धालु

सिहोरा

गांधीग्राम के हृदय स्थल में चारोंधाम राम जानकी मंदिर में स्थापित रामजानकी की अष्टधातु निर्मित मूर्तियां गांधीग्राम व आसपास के गाँव में आस्था व विश्वास का केंद्र हैं। मंदिर के पूर्व महंत स्व.श्री श्री 108 स्वामी महावीर दास जी महाराज दरियागंज इलाहाबाद व उनके शिष्य ब्रम्हचारी स्व प्रेमदास जी साथ  लगभग 45 वर्ष पूर्व मंदिर में अष्टधातु की मूर्तियां की स्थापना गांधीग्राम में हुई थी। नवरात्र के अवसर पर चारों ओर अनुपम झांकियोंं व साज सज्जा देखते ही बनती हैं। चारोंधाम रामजानकी व मंदिर के दूसरे कक्ष में मंदिर में ही जगत जननी मां जगदंबे की वर्षों पुरानी दूधिया संगमरमर की सुंदर प्रतिमा स्थापित है, प्रतिमाओं को जहां सुंदर वस्त्रों से सुसज्जित किया गया है। उन चारों धाम मंदिर में राम जानकी, राधा कृष्ण की अष्टधातु निर्मित नयनाभिराम मूर्तियों को स्वर्ण, चंद्र आभूषण से सुसज्जित किया गया वहीं अष्टभुजीय प्रतिमा को सजाया गया है।

भारत के कई प्रान्तों में भ्रमण कर आई हैं अष्टधातु की मूर्तियां

स्वामी महावीर दास जी रामलीला मंडली के साथ अष्टधातु की मूर्तियों को लेकर भारत के कई प्रांतों में भ्रमण करते हुए गांधीग्राम पहुंचे ओर यहीं पर  मूर्ति स्थापना हुई।चारोधाम रामजानकी मन्दिर गांधीग्राम की अष्टधातु की रामजानकी की दिव्य व नयनाभिराम प्रतिमाओं का भारत के अनेक प्रान्तों में क्रमशः महाराष्ट्र, कलकत्ता, आंध्रप्रदेश, गुजरात, उत्तरप्रदेश, इलाहाबाद, लखनऊ, दरियागंज,बिहार आदि स्थानों पर भ्रमण हो चुका है। बताया जाता है कि चारोंधाम भगवान की श्रीराम, जानकी,लक्ष्मण,भगवान श्रीकृष्ण,राधा, लडडू गोपाल की 400 वर्ष पुरानी अष्टधातु की मूर्तियां हैं।
रामजानकी मन्दिर समिति अध्यक्ष व पूर्व जनपद अध्यक्ष प्रताप सिंह बघेल, पुजारी पुनीत तिवारी व भागचंद साहू, विजय पंडा चौरसिया,गोविन्द शरण दुबे, चमन असाटी, हरिशंकर तिवारी,रेवाशंकर असाटी, राजकुमार असाटी, आनन्द सोनी,रामजी चौरसिया सहित भक्तगण मन्दिर में सुबह व रात्रिकालीन देवी माँ की आरती कर रहे हैं।