स्वप्न देकर करदही नदी से प्रकट हुई थी मां बंजारी

स्वप्न देकर करदही नदी से प्रकट हुई थी मां बंजारी

सांचे सजे मातारानी के दरबार : बंजारी माता मंदिर में लगी भक्तों की भीड़

सिहोरा

चैत्र नवरात्र का शुभारंभ से ही मां बंजारी की चतुर्भुजी प्रतिमा और मन्दिर दरबार को व विशेष रूप से सजाया गया है। पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग 7 के किनारे स्थित गांधीग्राम में मां बंजारी माता मंदिर श्रद्घालुओं के आस्था और विश्वास के केंद्र इस मंदिर में गांधीग्राम के अलावा आसपास के गांव के भक्त मातारानी का आशीर्वाद लेने पहुंचना प्रारम्भ हो गया है।


मंदिर में बंजारी माता की चतुर्भुजी पाषाण प्रतिमा के संबंध एक मान्यता है। बंजारी माता मंदिर समिति के अध्यक्ष अरविन्द सिंह  गौर के मुताबिक लगभग 1959 में बंजारी माता की दिव्य प्रतिमा मंदिर के किनारे स्थित करदही नदी के पानी में पड़ी थी। एक बार मंदिर के संस्थापक स्वर्गीय चंदन सिंह गौर को रात में मां बंजारी ने अपनी नदी में होने का एक स्वप्न दिया। चंदन सिंह ने इस स्वप्न को सच मानकर करदही नदी में मातारानी की पाषाण प्रतिमा को खोज निकाला और उसे नदी के ऊपर लाकर एक छोटी सी मढ़िया में स्थापित करा दिया। बाद में जन सहयोग से बंजारी माता के मंदिर निर्माण के बाद प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किया गया।
पौराणिक महत्व,  मां बंजारी मां नव दुर्गा के नव विविध स्वरूपों में से एक 

पौराणिक कथाओ से जुड़ी मान्यता है कि बंजारी मां नवदुर्गा के नव विविध स्वरूपों में से एक हैं। पौराणिक मान्यता अनुसार मां बंजारी को राक्षसराज शुंभ निशुंभ ने युद्घ के लिए ललकारा था। क्रोधित होकर मां ने युद्घ के लिए दौड़ी तो राक्षस राज शुंभ व निशुंभ गिरी कंदरा में प्रवेश कर गए। मातारानी व राक्षसराज शुंभ निशुंभ का भीषण युद्घ हुआ। मातारानी ने राक्षस राज का वध कर वापस लौटी तो मां के वापस विजयी मुद्रा का गिरी कंदरा के अंदर स्वरूप मातारानी की मूर्ती में द्रष्टव्य है।

मंदिर का महत्व

क्षेत्र में शक्तिपीठ के रूप में स्थापित मंदिर में नवरात्रि पर भक्तों की भीड़ उमड़ रहती हैं।नवरात्रि में प्रतिदिन शाम को महाआरती में अनेकों भक्त शामिल होते हैं। क्षेत्र के अनेक रामायण मण्डलों द्वारा नवदिवस संगीतमय रामायण, भजनों की प्रस्तुति दी जाती है।
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