हम श्याम जी के श्याम जी हमारे है,खितौला में श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन सिहोरा

हम श्याम जी के श्याम जी हमारे है,खितौला में श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन
सिहोरा

 जब एक भक्त भक्ति के रस में डूब जाता है और उसके हृदय में यह भाव जागृत हो जाता है कि हम श्याम जी के श्याम जी हमारे है तो यह वह क्षण होता है जब मनुष्य और प्रभु की दूरी समाप्त हो जाती है और आत्मा का परमात्मा से मिलन हो जाता है।
           खितौला के शिक्षक जितेन्द्र ठाकुर की वार्षिक स्मृति में खितौला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन आचार्य आकर्षण जी महाराज ने कहा कि मनुष्य अपने जीवन मे कितने भी साधनों को जोड़ ले पर वह उन साधनों के साथ मात्र से जीवन मे आगे नही बढ़ सकता।मनुष्य का सारा जीवन अपने परिवार और साथियों के मोह में ही पड़ा रहता है और जब मोह हटता है तो अपने आपको मृत्यु के निकट पाता है।ऐसा ही भय जब राजा परीक्षित को हुआ तो उन्होंने सद्गुरु की तलाश की।आचार्य आकर्षण जी ने आगे कहा कि गुरु वो है जो जीवन और मृत्यु की स्थिति को सामान्य कर दे।ये कटु सत्य है जीवन के सारे रंग केवल तब तक है जब तक सांस है और उसके बाद?मोह का प्रभाव जीवन मे रहना स्वाभाविक तो है पर मोह मात्र में रहे आना भगवान से दूरी बढ़ाता है।इसलिए मनुष्य को अपने जीवन को मोह से ऊपर उठाना होगा।
           नाना प्रकार के साधन जुटाने से मनुष्य कभी शांति प्राप्त नही कर सकता।प्रत्येक जीव को मोह के जाल से बाहर निकलने के लिए सत्संग का सहारा लेना पड़ेगा।कथा के द्वितीय दिवस आचार्य ने हिरण्यकश्यप और भक्त प्रहलाद की कथा का भी रसपान कराया।वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा सुंदर झांकी के प्रस्तुतिकरण ने भक्तों का मन मोह लिया।
Previous Post Next Post