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परिजन रचा रहे थे नाबालिग किशोरी की शादी, तभी धमक गई महिला बाल विकास विभाग और पुलिस की टीम

परिजन रचा रहे थे नाबालिग किशोरी की शादी, तभी धमक गई महिला बाल विकास विभाग और पुलिस की टीम

मझौली तहसील के सरौदा गांव का मामला : परियोजना अधिकारी और पुलिस की समझाइश के बाद माने परिजन, रोका बाल विवाह

मझौली 

मझौली तहसील के सरौदा गांव में परिजन नाबालिग किशोरी का बाल विवाह रचा रहे थे। बाल विवाह की भनक लगते ही महिला बाल विकास विभाग और इंद्राना पुलिस चौकी की टीम धमक गई। टीम ने परिजनों को बताया कि बाल विवाह करना कानूनन जुर्म है। ऐसा करने पर आप के खिलाफ प्रकरण दर्ज हो जाएगा। काफी देर तक परिजनों की काउंसलिंग करने के बाद आखिरकार वह बाल विवाह रोकने के लिए राजी हो गए। तब कहीं जाकर महिला बाल विकास विभाग और पुलिस की टीम ने राहत की सांस ली। 


ये है पूरा मामला 

परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग मझौली इंद्र कुमार साहू के मुताबिक ग्राम सरौदा निवासी धनीराम भूमिया ने अपनी पुत्री मधु भूमिया का विवाह सेमरा तिलवारा घाट जबलपुर निवासी वीरेंद्र भूमिया के साथ तय किया था। महिला बाल विकास विभाग की टीम को सूचना मिली की मधु की उम्र 16 वर्ष 7 माह है। परिवार वाले अपनी बेटी का बाल विवाह करने जा रहे हैं। इसके पहले मंगलवार को सेक्टर पर्यवेक्षक एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने परिवार की काउंसलिंग कर समझाइश दी थी। इसके बावजूद परिजन नाबालिक का बाल विवाह रचा रहे थे। 

2 वर्ष का कारावास और एक लाख जुर्माने का प्रावधान

मौके पर पहुंचे परियोजना अधिकारी इंद्र कुमार साहू, इंद्राना चौकी प्रभारी, सेक्टर पर्यवेक्षक और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने नाबालिग किशोरी के परिजनों को काउंसलिंग में बताया कि बाल विवाह अधिनियम 2006 के प्रावधानों के तहत बार विवाह करने पर नाबालिग के माता-पिता, परिजन, रिश्तेदार, सेवा प्रदाता सभी इसके दायरे में आ जाएंगे। अधिनियम का उल्लंघन करने पर 2 वर्ष का कारावास और 100000 जुर्माने का प्रावधान है। जिसके बाद परिजन विवाह नहीं करने पर राजी हुए।