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ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई अपेक्षाकृत तेज हुई : घरों के बोरों,हेण्डपम्पों के जलस्तर में कमी आई

ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई अपेक्षाकृत तेज हुई : घरों के बोरों,हेण्डपम्पों के जलस्तर में कमी आई 

सिहोरा

तेज गर्मी के प्रभाव से फसलों को बचाने व जमीन में नमी बनाए रखने के लिए उड़द,मूँग व सब्जी उत्पादक किसानों ने अपने खेतों से ग्रीष्मकालीन फसल रूप में बड़ी मात्रा में भिंडी, टमाटर, बैंगन, लौकी, बरबटी, मिर्च, ग्वांरफली, कद्दू, चेंज भाजी, खट्टा भाजी, खेड़ा भाजी फसल लगाए हुए हैं। इस समय तेज गर्मी पड़ रही है। नतीजा किसानों को फसल को बचाने अपेक्षाकृत अधिक सिंचाई कर रहे हैं जिससे फसल में नमी बनी रहे  वहीं गांधीग्राम व आसपास के दो दर्जन गांवों में गर्मी की फसल उड़द की फसल की खेतों के बोरों से दिनरात सिंचाई की जा रही है।इससे क्षेत्र के लगभग दो दर्जन गाँवो में घरों के बोरों व सार्वजनिक हेण्डपम्पों का भूजल स्तर नीचे खिसक जाने से बोरों से पानी आना बन्द हो गया है। जिससे जलसंकट लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वर्तमान गर्मी के मौसम में पेयजल की समस्या सभी के लिए चुनौती बन चुकी है। भू-जलस्तर गंभीर चिंता का विषय है। शासन प्रशासन पिछले कई सालों से गिरते भू-जलस्तर की समस्या से निपटने के लिए अनेक प्रकार के जन-जागरूक अभियान चला रही है, किसानों को भी कम पानी में खेती के तरीके सिखाए जा रहे हैं। बावजूद इसके कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आ रहे हैं। 

गर्मी की उड़द की खेती में सिंचाई चिंता का विषय

यहां क्षेत्र में गर्मी के दिनों में होने वाली उड़द की खेती में सबसे अधिक पानी की बर्बादी हो रही है।  गिरते भू-जलस्तर को लेकर अगर हम अभी नहीं संभले तो बहुत देर हो जाएगी।
क्षेत्र में गर्मी की फसल उड़द की खेती इस वर्ष 80 प्रतिशत किसानों  द्वारा की जा रही है। लेकिन ग्रामीण अंचल में  किसान गर्मी के मौसम में भी उड़द की फसल का उत्पादन करते हैं। इस साल भी बड़ी मात्रा में उड़द की खेती की गई है, जिन गांवों में इस वक्त उड़द की खेती जा चुकी है एवं उड़द की सिंचाई की जा रही है, उन सभी गांवों में जल संकट की स्थिति निर्मित होने लगी है।
 फसल में नमी बनाए रखने के लिए  किसान सिंचाई के लिए कूप एवं बोरवेल से पूरा दिन पानी निकालते हैं। इस कारण गांव के अन्य पेयजल स्रोतों पर प्रभाव पड़ता है। जलस्तर कमजोर होता है और गांव में पीने के पानी की दिक्कत होती हैं। जानकार बताते हैं कि अगर, इसी तरह बेमौसम फसलों का उत्पादन करने में पानी खर्च किया गया तथा इस पर विराम नहीं लगाती तो भविष्य में पानी के तमाम स्रोत सूख जाएंगे।

इन गाँवो में बोरों का जल स्तर खिसका

गांधीग्राम, डूड़ी,माल्हा,मोहनियां, मिढ़ासन ,उमरिया,तपा कैलवास, खुड़ावल, धनगवाँ, देवनगर, पथरई ,शहजपुरा,कूड़ा, कंजई,रामपुर, धमकी,बम्होरी सहित आसपास के अन्य गांवों में जलस्तर खिसक गया है।