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रामसागर तालाब सूखा गोसलपुर में गहराया जल संकटअचानक गिरा जल स्तर ग्रामीण चिंतित

रामसागर तालाब सूखा गोसलपुर में गहराया जल संकट
अचानक गिरा जल स्तर ग्रामीण चिंतित

गोसलपुर 

सिहोरा तहसील मुख्यालय से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गोसलपुर का रामसागर तालाब इस वर्ष की भीषण गर्मी में सूख गया
ज्ञात हो की रामसागर तालाब लगभग 15 एकड़ भूभाग में फैला है जो की इससे पहले कभी नहीं सूखा इस वर्ष की भीषण गर्मी के कारण भूमिगत जल स्तर लगातार कम हुआ जिस कारण ग्राम के कुआ तालाब तलैया बावली नल जल योजना के अनेकबोर सूख गए जिससे ग्राम में पीने के पानी व मवेशियों के पीने की पानी की विकट समस्या उत्पन्न हो गई
रामसागर तालाब के सूखने की खबर से जहां एक और ग्रामवासी चिंतित हैं वही सबसे बड़ी समस्या मूक पशुओं के सामने खड़ी हो गई है
ज्ञात हो की रामसागर तालाब से ग्रामवासी पानी का उपयोग करते थे वही कुमहार लोग इसी पानी से खपरा ईंट इत्यादि बनाते थे
इस तालाब में सिंघाड़ा की खेती मछली पालन भी होता था

सफाई की मांग

ग्राम वासियों ने रामसागर तालाब की सफाई की मांग की है पूरे तालाब में गंदगी व कीचड़ भरा पड़ा है कई दशकों से तालाब की सफाई नहीं हुई जिस कारण पुराव काफी बढ़ गया है वही मिट्टी की मोटी सिल्ट जमी हुई है तालाब के सभी घाट की सीढ़ियां क्षतिग्रस्त हो गयी है जो मरम्मत कराने योग्य हो गयी है

गहरीकरण की मांग

इस प्राचीन तालाब तालाब के निर्माण को लेकर पुरानी लंबी कहानी है बुजुर्ग अच्छेलाल राजभर बताते हैं की समर्थ बाबा रामदास का समाधि स्थल भी इसी तालाब के किनारे बना है तालाब के दो घाटों में प्राचीन विशाल शिव मंदिर हनुमान मंदिर राधा कृष्ण मंदिर है
बताया जाता है की समर्थ बाबा रामदास तीन घरों से भिक्षा मांगते थे भिक्षा मे मिली राशि से यह तालाब पांच सौ साल पहले 
खुदवाया गया था जिस कारण यह तालाब लोगों के लिए आस्था का प्रतीक भी माना जाता है
ग्रामजनों ने जिला कलेक्टर से तालाब गहरीकरण की मांग की है

घाटों की दुर्दशा

तालाब मे चार घाट स्थित है
धोबी घाट शिवघाट कुटीघाट गौऊघाट की सीढ़ियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है
जानकार बताते है की
 जल प्रबंधन के मामले में जबलपुर जिला मे सिहोरा तहसील के बुजुर्गों ने जल के महत्व को समझ लिया था ग्रामीण क्षेत्र में बुजुर्गो द्वारा तालाब काफी संख्या में खुदबाये गए और उन्हें संरक्षित किया गया था पूर्वज इन्ही प्राकृतिक जल स्रोतों से अपनी दैनिक दिनचर्या से जुड़ी सभी जरूरतों को पूरा करते थे किंतु वर्तमान में अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही के कारण तालाबो के अस्तित्व पर खतरा के बादल मंडरा रहे है तालाबों से प्रतिवर्ष कई लाख की आवक मछली पालन व सिंघाडा से होती है परंतु रखरखाव के नाम पर फूटी कौंडी खर्च नहीं होती
हाईवे के किनारे बस स्टैंड बस्ती से लगा ऐतिहासिक तालाब की संरचना ऐसी है की इसमें गर्मी के दिनों में भी आधे भूभाग में पानी रहता था जिससे ग्राम के अन्य जल स्रोतों का जल स्तर मेंटेन रहता था साथ ही लोगों के निस्तार व मवेशियों को पीने के पानी की बढ़िया व्यवस्था थी परंतु इस वर्ष रामसागर तालाब पूर्ण रूप से सूख गया तालाब में रहने वाले जलीय जीव जंतुओं का जीवन प्रभावित हो गया जैव विविधता और तालाब का पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित हो गया
विशाल क्षेत्रफल वाले इस तालाब के घाटो में स्थित मंदिर
पुरानी शिल्प कला की बेहतरीन तस्वीर पेश करते है

जवावदारो की अनदेखी

इस प्राचीन जल स्रोत को बचाने प्रशासन कोई पहल नही कर रहा
इसके प्रति लोगों को जागरुक करने के साथ-साथ खुद जिम्मेदारो को भी आगे आना होगा
लोगो का कहना है की पुराने जल स्त्रोतों के रखरखाव पर अगर ध्यान दिया जाता तो समस्या का समाधान काफी हद तक संभव था
लेकिन इनके संरक्षण पर ध्यान देना तो दूर बल्कि इसे जमींदोज कर सीमेंट कांक्रीट का जंगल तैयार करने भूमाफिया एवं प्रशासन की मिलीभगत नगर में जन चर्चा का विषय बनी हुई है
सीनियर एडवोकेट राकेश पाठक का कहना है की परंपरागत जल स्रोतों की उपेक्षा एवं अंधाधुंध नलकूपो के खनन ने भूजल का स्तर पाताल तक पहुंच गया इसको लेकर चिंता भी व्यक्त की जा रही है
लेकिन वगैर किसी ठोस कार्ययोजना के समस्या से निपटने का दिव्य स्वप्न गंभीर जल संकट की ओर धकेल रहा है पुराने जल स्त्रोत उपेक्षा की वजह से अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं
भू माफिया का शिकार हुए ताल तलैया अनेक ताल तलैया भू माफिया की धन लोलुपता का शिकार हो चुके है

वर्षा पूर्व संरक्षण की मांग

स्थानीय लोगों ने क्षेत्र के प्राचीन जल स्रोतों के संरक्षण की मांग की है ताकि वर्षा के जल को संग्रहित कर उपयोग में लाने के साथ-साथ गिरते भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके