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Wee report - छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य बचाओ आन्दोलन में कूदे राकेश टिकैत, 11 मई को 8 देशों में भी होगा विरोध प्रदर्शन




छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य बचाओ आन्दोलन में कूदे राकेश टिकैत, 11 मई को 8 देशों में भी होगा विरोध प्रदर्शन

रायपुर, 10 मई। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार की तरफ से परसा कोल ब्लॉक में खनन को मंजूरी देने के बाद इस इलाके से करीब साढ़े चार लाख पेड़ काट दिए जायेंगे। अपने जंगल को बचाने खनन के खिलाफ लामबंद हसदेव अरण्य के आदिवासियों को पूरी दुनिया से समर्थन मिलने लगा है। सरगुजा की परसा खदान से प्रभावित होने वाले हरिहरपुर गांव में कई महीनो से आदिवासियों का धरना जारी है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत से लेकर दुनियाभर के कई देशो के नागरिक हसदेव अरण्य में काटने जा रहे लाखों पेड़ को बचाने के लिए आगे आ गए हैं।


पेड़ो की कटाई के खिलाफ राकेश टिकैत ने उठाई आवाज
हमेशा भाजपा के खिलाफ मुखर रहने वाले किसान नेता राकेश टिकैत इन दिनों छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों का खुलकर विरोध कर रहे हैं। हाल में नया रायपुर के किसान आंदोलन का समर्थन कर चुके राकेश टिकैत ने अब छत्तीसगढ़ में पेड़ों की कटाई के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है । हसदेव अरण्य में कोयला खनन के लिए होने वाली पेड़ो की कटाई का विरोध करते हुए उन्होंने ट्वीट किया है कि छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में लगभग साढ़े चार लाख पेड़ काटे जा रहे है। किसान नेता टिकैत ने आगे आरोप लगाया कि कॉर्पोरेट को फायदा पहुंचाने के लिये सरकार पर्यावरण से छेड़छाड़ कर रही हैं। जिसका सीधा असर जल, जंगल, जमीन पर होगा। पाने ट्वीट में टिकैत ने आगे लिखा, हसदेव अरण्य आंदोलन के साथ पूरा देश खड़ा हुआ है।



फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव के आधार पर कोयला खनन परियोजना ?
इधर हसदेव अरण्य बचाने के लिए आदिवासियों का साथ दे रहे सामाजिक संगठन छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने पेड़ काटने से पूर्व एनटीसीए और नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ को जानकारी नहीं दी है। महत्वपूर्ण है कि इस प्रोजेक्ट के लिए शासकीय आंकड़ों के मुताबिक, हसदेव अरण्य के परसा कोल ब्लॉक में 95,000 पेड़ काटे जायेंगे। हालांकि सामाजिक कार्यकर्ताओं का अनुमान है कि कटने वाले पेड़ों की असल संख्या 4 लाख से ज्यादा होगी।सरगुजा के परसा कोयला खदान से प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने कोयला खनन परियोजना को फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव के आधार पर आगे बढ़ाया है।



ग्रामीण का विरोध जारी
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 6 अप्रैल को परसा कोल ब्लॉक में खनन परियोजना के लिए वन स्वीकृति जारी की थी। परसा खदान राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित की गई है। सरकार की तरफ से खनन को हरी झंडी दिए जाने के बाद भी आदिवासियों का संघर्ष अब भी जारी है। खदान से प्रभावित गांव साल्ही, हरिहरपुर और फतेहपुर के ग्रामीण का विरोध जारी रखे हुए हैं।

पेड़ो के काटने का काम शुरू हसदेव अरण्य क्षेत्र में ग्रामीणों के विरोध के बावजूद वन विभाग ने करीब 2 लाख पेड़ काटने का काम शुरू कर दिया है। इन पेड़ों को कटने से बचाने के लिए आदिवासी ग्रामीण खुलकर विरोध में आ गए है। अपना घर छोड़कर पूरी रात ग्रामीण जंगलो में बीतकर पेड़ो की रखवाली कर रहे हैं।


11 मई को वाशिंगटन समेत दुनिया के 8 देशों में प्रदर्शन

हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा कोल ब्लॉक में खनन शुरू किए जाने के खिलाफ 2 मार्च से ग्राम हरिहरपुर जिला सरगुजा में अनिश्चित कालीन धरना जारी है। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संचालक आलोक शुक्ला का कहना है कि हसदेव अरण्य को बचाने पूरे देश में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि हसदेव अरण्य में पेड़ो की कटाई रोकने 11 मई को वाशिंगटन समेत दुनिया के 8 देशों में प्रदर्शन होगा।