Weereport - किसानों के फर्जी पंजीयन की सूची डिलीट, मामला ठंडे बस्ते में

किसानों के फर्जी पंजीयन की सूची डिलीट, मामला ठंडे बस्ते में

सीता टंडन जांजगीर 



अकलतरा। लटिया पकरिया धान मंडी में हुए फर्जी किसानों का पंजीयन मामले में फर्जी किसानों की सूची डिलीट करने के चलते जांच में ठंडे बस्ते में चली गई है ।  तत्कालीन तहसीलदार और तत्कालीन कम्प्यूटर आपरेटर द्वारा एक दूसरे पर दोषारोपण किया जा रहा है । इस मामले में जांच.दल ने एन आई सी को पत्र लिखा है  मिली जानकारी के अनुसार पिछले धान खरीदी वर्ष 20201-22 में अकलतरा अंतर्गत धान समिति लटिया पकरिया में सात ऐसे किसानों के नाम पंजीयन कराये गये थे जिनके नाम कोई जमीन नही थी और न ही वे उस गांव के थे और सबसे बडी बात यह कि इस फर्जीवाड़ा के मास्टरमाइंड ने बहुत ज्यादा चतुराई दिखाते हुए अपने निजी और घरेलु लोगों के  खाता नंबर पंजीयन के लिए दिये जिससे उन फर्जी किसानों के खातो में राशि न जाये क्योंकि वे फर्जी किसानों को स्वयं नही मालूम था कि उनके नाम 32 हेक्टेयर (90 एकड) जमीन धान विक्रय हेतु पंजीकृत हो चुकी हैं लेकिन मजे की बात यह है कि छत्तीसगढ़ी कहावत " जादा चतुरा  के चात्तर " को चरितार्थ करते हुए किसानों के नाम और खाताधारकों के अलग-अलग नामो ने इस फर्जीवाड़े की पोल खोलकर रख दी है । इस फर्जीवाड़े में धान खरीदी के पूर्व ही यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था और इतने बडे़ फर्जीवाड़े की शिकायत लाजिमी थी इसलिए शिकायत हुई और फर्जीवाड़ा करने.वाला सावधान हो गया और उसने फर्जी किसानों की सूची डिलीट कर दी इसलिए जांच दल को जांच करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है । जांच दल अधिकारी शरद सिंह के अनुसार नायब तहसीलदार आस्था चंद्राकर के स्थांनातरण के कारण जांच में बाधाएं आ रही है साथ ही फर्जी किसानों की सूची भी डिलीट कर दी गयीं है जिसके कारण जांच की दिशा सही तरीकें से आगे नही बढ़ पायी है । 



विधानसभा में गूंजा था यह फर्जीवाड़ा

अकलतरा विधायक को इस बात के लिए जाना जाता हैं कि उन्होंने अब तक जितने भी मुद्दे उठाये है उसका पटाक्षेप करके ही दम लिया है । उनकी कार्यशैली किसी से छिपी नहीं है इसलिए उन्होंने यह मुद्दा उठाया तो धान मंडियों में होने वाले भ्रष्टाचार से खार खाये लोगो " कलेजे में अब ठंडक पड़ी" वाली एक राहत की सांस ली । तेजतर्रार और प्रखर विधायक सौरभ सिंह ने इस.मामले को विधानसभा में उठाया था और इसके लिये तीन सदस्यीय जांच.दल बैठाया था लेकिन साल भर बाद भी यह जांच आगे नही बढ़ पायी है और इसके आरोपी आज भी खुले सांड की शिकायत करने वालो को सींग दिखाते हुए  घूम रहे है ।

पूरे जिले में हुआ है ऐसा खेल 

छत्तीसगढ़ को धान खरीदी मे दूसरा स्थान मिला है लेकिन इसकी ईमानदारी से जांच कराई जाये तो लगभग 25 प्रतिशत मामले ऐसे ही है जहां शासकीय जमीन का पंजीयन कराकर धान बेचा गया है लेकिन लटिया का मामला इस मामले में अलग इसलिए है कि यहां का " चतुर सिंग "ने ज्यादा चतुराई दिखाते हुए जमीन का मालिक किसी और को और खाता किसी अपने निजी व्यक्ति का दिया है जिससे धान विक्रय की राशि अपने ही पास आसानी से आ जाये ।

जैजैपुर में हुई थी शिकायत सदमे मे मरा एक आरोपी

इसी तरह.का एक फर्जीवाड़ा जैजैपुर के नंदेली और कोटेतरा और.अनेक ग्राम पंचायतो में हुआ था जिसमे किसानों ने धान समिति और बीज निगम दोनो संस्थाओं में पंजीयन कराकर धान बेचा था.। यह बात बाहर आयी तो शिकायत हुई और  उन किसानों में से एक किसान नारद चंद्रा की सदमे से मौत हो गयी थी जिसके कारण शिकायत कर्ता ने आत्मग्लानि में शिकायत वापस ले ली थी परंतु पूरे जैजैपुर में ऐसे किसानों की संख्या बहुत ज्यादा है जिन्होंने या तो सरकारी जमीनो का पंजीयन कराकर धान.बेचा है या बीज निगम.और.धान समिति दोनो संस्थाओं में पंजीयन कराकर धान बेचा है परंतु अब तक जांच दल की लापरवाही और लेटलतीफी के कारण ऐसे आरोपी खुले घूम रहे है ।

आप लोग केवल किसान को ही दोष देते है जबकि यह अधिकारियो की भी भयंकर लापरवाही का नतीजा है । पकरिया लटिया की जांच.अभी पूरी नहीं हुई है ।

डी आर जायसवाल उपसंचालक धान मंडी
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फर्जी किसानों की आनलाइन सूची डीलिट करने के कारण जांच अधर में है । एन आई सी को पत्र.लिखा गया है ।

शरद सिंह शाखा प्रबंधक अकलतरा 
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इस वर्ष बीज निगम मे पंजीकृत किसानों की सूची धान समिति को भेजी जायेगी जिससे ऐसा फर्जीवाड़ा न हो ।

जी टी पांडे शाखा प्रबंधक बीज निगम
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