Ticker

6/recent/ticker-posts

आखिर कहां गई लाखों रुपए की इमारती लकड़ी, नगर पालिका के सिहोरा जिम्मेदार झाड़ रहे पल्ला

आखिर कहां गई लाखों रुपए की इमारती लकड़ी, नगर पालिका सिहोरा के जिम्मेदार झाड़ रहे पल्ला


मझौली बाईपास में काटे गए थे भारी भरकम आधा दर्जन से अधिक पेड़ 



चोरी छुपे लकड़ी के टालों में पहुचा दी गई , दिखावे के लिए खाली प्लाट में डाल दी 2 से 3 ट्रॉली लकड़ी 

सिहोरा 

मझौली बाईपास में विश्व पर्यावरण दिवस के दिन विकास के नाम पर वर्षों पुराने हरे-भरे आधा दर्जन से अधिक पेड़ों को काट तो दिया गया, लेकिन काटे गए पेड़ों की लकड़ी आखिर कहां है इसका कोई भी जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से बच रहा है। करीब 9 से अधिक पेड़ों को काटने के बाद दो से तीन लाख की इमारती लकड़ी कहां गायब हो गई इसका कुछ भी अता पता नहीं है। हरे-भरे भारी-भरकम वृक्षों को काटने के लिए नियमों को ताक पर रखकर कोई भी परमिशन नहीं ली गई थी। नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे पर जवाबदारी डाल कर पल्ला झाड़ रहे हैं। दो से तीन ट्रॉली लकड़ी मझौली बाईपास में एक प्लाट में पड़ी है। लेकिन बाकी लकड़ी आखिर कहां गई यह एक बड़ा प्रश्न है। 


पीछे के रास्ते से तालों में पहुंच गई इमारती लकड़ी

जानकारों की मानें तो पोहा के जिन भारी-भरकम वृक्षों को काटा गया था। उन वृक्षों से करीब 25 से 30 ट्रॉली लकड़ी निकली थी। सूत्रों की मानें दो चार ट्रॉली को छोड़ दिया जाए इसके बावजूद 25 से अधिक ट्रॉली इमारती लकड़ी को सिहोरा के अलग-अलग लकड़ी के टॉलों में पीछे के रास्ते पहुंचा दी गई। जिसकी कीमत लाखों रुपए बताई जा रही है। मतलब सीधा है कि शहद का छत्ता दिखाने के लिए छोड़ दिया गया और शहद बंट गई। 

लकड़ी नगरपालिका की थी तो गोदाम में क्यों नही रखी गई 

बड़ा सवाल यह है कि टेंडर के नियमों के अनुसार पेड़ों को कटवाने का काम नगरपालिका को करना था। जब नगर पालिका ने इन पेड़ों को कटवाया तो उसकी लकड़ी को स्वयं के गोदाम में क्यों नहीं रखवाया गया, बकायदा उस लकड़ी का शासकीय नियमों के तहत सर्दी के समय अलाव के लिए उपयोग होता या फिर उस लकड़ी की नीलामी की जाती, लेकिन यहां दोनों ही चीजें कहीं भी देखने को नहीं मिली नियमों को दरकिनार कर कुछ दलालों ने अपनी जेबें भर लीं। आलम यह है कि ठंड के समय जब सिहोरा के अलग-अलग क्षेत्रों में अलार्म लगाना होता है तो लकड़ी के लिए बकायदा टेंडर किए जाते हैं। लकड़ी के लिए लाखों रुपए का टेंडर करवाकर उसे दे दिया जाता हैं।