Weenews - पोड़ी दल्हा में लगा जनसमस्या निवारण शिविर , मगर जनसूचना के अभाव में सिमटा

जांजगीर । अकलतरा के सभी  ग्राम पंचायत की तरह पोडीदल्हा में जनसमस्या निवारण शिविर लगाया गया जिसमे गांव की जनसंख्या के अनुपात में भीड़ नगण्य थी कारण बताया जा रहा है कि इस शिविर की सूचना कोटवारों द्वारा लोगों को दी गयी थी परंतु वह केवल औपचारिकता निभाने के लिए , कारण यह है कि जनसमस्या निवारण शिविर में सरपंच और सचिव के खिलाफ शिकायतों के डर से सरपंच ने ठीक तरह मुनादी नही कराई है । मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत पोडीदल्हा का जनसमस्या निवारण शिविर सिर्फ औपचारिकता निर्वाह बनकर रह गया क्योंकि इस शिविर का पता लोगों को नही था ।

पुलिस , हास्पीटल और स्कूल से संतुष्ट है ग्रामवासी

इस शिविर में ग्राम पंचायतों मे होने वाली समस्याओं को 18 बिदुओं मे क्रमवार ग्रामीणों से हां या ना मे ग्राम नोडल अधिकारी के पूछने पर लोगों ने पुलिस हास्पिटल और स्कूल से संतुष्टि जताई । 

शौचालय और पेंशन सबसे बडी समस्या

इस शिविर मे शौचालय पेंशन और निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सही समय पर मजदूरी भुगतान वाले बिदु पर लोगो ने असंतुष्टि जाहिर की है वही एक महिला सहोदरा बाई ने.बताया कि उसे तीन साल से पेंशन नही मिल रहा है और एक मृत महिला बुधवारा बाई को तीन.साल सें लगातार पेंशन दिया गया है और शिकायत के बाद उसका पेंशन बंद किया गया परंतु जीवित और कमजोर महिला को पेंशन के लिए तीन सालो से चक्कर लगाने मजबूर किया जा रहा है । पहली बार मुख्यमंत्री पोर्टल मे जवाब दिया गया था कि महिला बाहर रहती हैं इसलिए पेंशन नही मिल रहा है दूसरी बार बताया गया है महिला को पेंशन मिल रहा है 

ओडीएफ ग्राम मे लोगो को नही मिली राशि शौचालय की

ऐसे ही शौचालय मामले मे अधिकांश लोगों ने बताया है कि उनके घरो में स्वयं के बनाए शौचालय है लेकिन उन्हें राशि नही दी गयी है । कमला बाई साहू जो मितानीन भी है उन्होंने बताया कि उनका शौचालय का आवेदन निरस्त कर दिया गया क्योंकि उन्हें शौचालय की राशि दी जा चुकी है जबकि उनका कहना है कि मुझे अब तक यह राशि अप्राप्य है उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री के पोर्टल मे करने की बात कही है ।

हम लोगों की समस्या एक दिन के शिविर से खत्म नही होगी बल्कि इसे खत्म करने के लिए सरपंच., सचिव तथा उच्च अधिकारियों के ईमानदार नीयत की जरूरत है जो किसी में नही है । यह सिर्फ मुख्यमंत्री के दौरे की वजह से नाटकबाजी की जा रही है ।

ग्रामीण जन
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