"हरा पत्ता हो रहा लाल" सिंघाड़ा की खेती में अज्ञात बीमारी का प्रकोप

"हरा पत्ता हो रहा लाल" सिंघाड़ा की खेती में अज्ञात बीमारी का प्रकोप

जिम्मेदार बेखबर :  सिंघाड़ा उत्पादक किसान चिंतित

सिहोरा

मध्यप्रदेश में सिंघाड़े के उत्पादन में अव्वल रहने वाली सिहोरा तहसील का किसान जिम्मेदारों की अनदेखी व शासकीय मदद न मिलने के कारण सिंघाड़ा की खेती से
बर्मन समाज के किसानों ने धीरे-धीरे सिंघाड़े की खेती से मुंह मोड़ लिया है। आपको बता दें कि इस समय सिंघाड़ा की फसल का बीजारोपण चल रहा है। तालाब तलैया में सिंघाड़ा उत्पादक किसान पिछले एक महीने से सिंघाड़ा की बेल लगा रहे हैं। जिसमें पिछले दिनों से अज्ञात बीमारी का बड़ी तेजी से प्रकोप फैला हुआ है। नतीजा यह हो रहा है की सिंघाड़ा उत्पादक किसान तालाब पोखर में सिंघाड़ा लगाता है और दो-चार दिन बाद हरा पत्ता लाल पता में बदल जाता है। सिघाड़े की बेल में गलन होकर पत्ता टूट जाता है। जिससे पौधा बड़ा आकार नहीं ले पा रहा है।

उद्यानिकी विभाग में लटका रहता है ताला विभागीय अधिकारी गायब

 इस संबंध में न ही उद्यानिकी विभाग ध्यान दे रहा है और न ही शासन-प्रशासन, जिससे सिंघाड़ा उत्पादक किसान लंबे कर्ज के बोझ तले दब रहे हैं। क्षेत्रीय किसान बेड़ीलाल बर्मन, सीताराम, चंद्रकिशोर, मौजीलाल, शिवकुमार, कल्लू अंबिका, जागेश्वर, रामचरण, सुशील बर्मन ने बताया की पिछले एक महीने से सिंघाड़ा की खेती में तेजी से अज्ञात बीमारी का प्रकोप फैला हुआ है और सिंघाड़ा उत्पादक किसानों को न ही इस बीमारी से बचाव हेतु विभाग द्वारा कोई प्रशिक्षण दिया जा रहा है
न ही कोई दवा उपचार का तरीका बताया जा रहा है। जिससे सिंघाड़ा उत्पादक किसान बेहद परेशान हैं। 


सिंघाड़े की खेती से दूर हो रहे किसान

सिंघाड़ा उत्पादक किसानों ने अनेकों बार उक्त बीमारियों से बचाव के उपाय जानने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई परंतु उन्हें किसी भी प्रकार से उक्त बीमारियों के बचाव की विधि नहीं बताई गई। जिससे नतीजा यह हुआ की धीरे-धीरे सिहोरा तहसील के सिंघाड़ा उत्पादक किसान सिंघाड़ा की खेती से दूर होते जा रहे हैं।
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