मानननीयो का बढा वेतन - स्वागत है ?

कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री के निवास पर मंत्री परिषद की बैठक हुई जिसमे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये । इस.बैठक में एक और अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है जिससे विधानसभा के नब्बे विधायक , विधानसभा उपाध्यक्ष सहित कुछ सत्तारूढ़ और गैर कांग्रेसी नेता भी खुश है क्योंकि उनके अर्थात छत्तीसगढ़ के माननीयो के मानदेय में वृद्धि की गई है । इस निर्णय के अनुसार विधायकों के वेतन में तीस.से चालीस हजार की वृद्धि होगी और सबसे उल्लेखनीय बात यह कि इन माननीयो को उस दूरभाष के उपयोग का भी भत्ता दिया जायेगा  जो आज कोयले वाले इंजन की तरह चलन से बाहर हो चुकी हैं । इस निर्णय के अनुसार पांच हजार टेलीफोन भत्ता भी इन माननीयो को दिया जायेगा जबकि यह बात बिल्कुल आइने की तरह साफ है कि आज टेलीफोन लोगो के घरो में एंटीक पीस की तरह केवल शोभा बढ़ा रहे हैं और शासन ही इन माननीयो के मोबाइल नंबर जारी करती हैं जिससे आम जनता अपने.नेता , विधायक यहां तक कि मुख्यमंत्री से भी बात कर सके और सभी जानते है कि मोबाइल का खर्च हरेक माह पांच सौ रुपये से ज्यादा नही हो सकता है परंतु इसका.विरोध कौन करे , क्योंकि बात-बात पर एक दूसरे के लिए विरोध का झंडा बुलंद करने वाले माननीय इस बार इस निर्णय से पूरी तरह एकमत है  कारण भी साफ है कि इस निर्णय से सोने में सुहागा कि कुबेरपति भला लक्ष्मी मां को घर आने से भला कैसे मना करें । इस निर्णय के अनुसार माननीयो के मानदेय के संबंध आगे यह भी कहा गया है कि छत्तीसगढ़ के माननीयों का मानदेय मध्यप्रदेश के माननीयो की तुलना में कम है और इसे जल्दी ही मध्यप्रदेश के माननीयो के बराबर किया जायेगा । अब इसमें अनोखी बात क्या है । यह बात आज तीन से चार वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के महाविद्यालयों में पढ़ा रहे संविदा और अतिथि प्राध्यापकों की याद दिलाती है । मध्यप्रदेश के महाविद्यालयों में लंबे समय से पढ़ा रहे अतिथि प्राध्यापकों ने हड़ताल करके सरकार को मजबूर कर दिया था कि वे उन्हे नियमित करे । इस हड़ताल से सरकार इतनी परेशान हो गई थी कि अतिथि और संविदा प्राध्यापकों को नियमित तो नहीं किया गया लेकिन उनकी कुछ मांगो को अवश्य माना गया था । अपने पड़ोसी राज्य के अतिथि प्राध्यापकों की इस जीत से खुश छ.ग. के अतिथि प्राध्यापकों ने भी सरकार से मांंग की कि उन्हें भी मध्यप्रदेश के अतिथि प्राध्यापकों की तरह कुछ रियायतें दी जाये लेकिन उस समय तत्कालीन सरकार ने यह मां नही मानी और आज की सरकार उस समय बदली हुई भूमिका में थे और उन्होंने वादा किया था कि अगर वे सत्ता में आते है तो उन सभी कर्मचारियों और अतिथि प्राध्यापकों को नियमित कर देगी लेकिन आज सत्ता में आने के तीन साल बाद भी वो दिन कभी नही आया और वे अतिथि और संविदा मे पढ़ाने वाले प्राध्यापक हताश होकर धारा 28 के तहत चपरासी से भी कम वेतन में निजी महाविद्यालय मे पढ़ा रहे है तो कहीं फालतु बैठकर शराब से गम गलत कर रहे है और कुछ अतिथि प्राध्यापक तो नियमितीकरण की राह तकते हुए इस दुनिया से ही कूच कर गये है लेकिन माननीयो.के वेतनमान में बढ़ोत्तरी एक स्वर में सबने बिना मतभेद , बिना बहस सबने स्वीकार कर लिया है बल्कि इस मामले में मध्यप्रदेश के मानननीयो के बराबर मानदेय का इरादा भी भविष्य में पक्का कर लिया है ।
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