Harrashment- हिंसा - देश , समाज , कानून और मां का दायित्व








बचायी जा सकती थी किशोरी की जान

जांजगीर (अकलतरा) अकलतरा क्षेत्र की एक नाबालिग लड़की ने आत्महत्या कर ली । अकलतरा पुलिस के अनुसार नाबालिग ने यह आत्महत्या स्कूल के अन्य छात्रो द्वारा उसके प्रेम प्रसंग को जानने पर और घर में भी यह बात बता देने की धमकी पर किया जाना बताया  है । उस नाबालिग को गांव के कुछ साथ में पढ़ने वाले लड़के छेड़छाड़ किया करते थे जो उस नाबालिग को नागवार गुजरता था । छेड़छाड़ से परेशान उस नाबालिग ने एक दिन आत्महत्या करके इन सारी समस्याओं को जड़ से मिटा दिया अब हमारे सामने अट्हास करता एक बड़ा सवाल खड़ा है कि क्या इस आत्महत्या को नहीं रोका जा सकता था ? अंतरिक्ष की बड़ी-बड़ी गुत्थी सुलझाने वाले मानव तुमसे किशोर से युवा होते मन की गुत्थी सुलझायी नहीं गयी यह सवाल ग्रामीण समाज सहित सारे शहरी समाज के जेहन में तीर की तरह चुभना चाहिेए और साथ ही यह सवाल पुलिसिया कार्यवाही से परे उस नाबालिग लड़की के परिवार में मंथन किया जाना चाहिए ।‌ क्या उस नाबालिक की आत्महत्या को उसके परिवार के द्वारा रोका जा सकता था । इस विषय में सबसे पहले हमने अकलतरा पुलिस से बात की । उनका कहना है कि कानून और पुलिस महिलाओं और लड़कियों के प्रति हो रहे अपराध के लिए बहुत संवेदनशील है । मैं आपके अखबार के माध्यम से तमाम लड़कियों और महिलाओं को संदेश देना चाहूंगा यदि उनके प्रति किसी तरह का अपराध घटित हो रहा है या उन्हें किसी के द्वारा परेशान किया जा रहा है या अन्य ऐसी कोई भी घटना जो उन्हें परेशान कर रही हैं तो वे निसंकोच पुलिस से मदद लें मैं आपको यह भी बताना चाहूंगा की इस मामले में पुलिस ऐसे पीड़िता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखती है जिससे ऐसे मामले में पीड़िता सामाजिक आलोचना और वर्जनाओं के भय से मुक्त होकर पुलिस की मदद लें सके । अकलतरा थाना प्रभारी लखेश केंवट ने यह भी बताया कि जो महिलाएं सीधे पुलिस के पास आकर मदद नहीं ले सकती हैं उनके लिए पुलिस विभाग ने *अभिव्यक्ति* नाम से एक मोबाइल एप लांच किया है । अगर किसी महिला के साथ कोई अप्रिय घटना घटित हुई है या किसी अप्रिय घटना , दूर्घटना घटने का भय है वह महिला उस एप में जाकर अपनी शिकायत घर बैठे मोबाइल के माध्यम से दर्ज करा सकती है उन्हें तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और उनका नाम और पता पूरी तरह गुप्त रखा जायेगा निर्भया कांड के बाद शासन ने महिलाओं के प्रति हो रही हिंसा को रोकने और उन्हें मदद करने हर जिले में  सखी स्टाप सेंटर स्थापित किया गया है जहां महिलाओं को चिकित्सा , कानूनी मदद , आवास , सहित पांच प्रकार की सुविधाएं दी जाती है । उन्होंने आगे बताया कि 1081 नंबर पर *सखी स्टाप सेंटर* की मदद भी ली जा सकती है  जिला भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष रजनी साहू इस विषय में जब हमने पूछा तो उन्होंने रूंधे गले से कहा कि मैं जब भी इस तरह की घटनाओं को देखती हूं या पढ़ती हूं मुझे बहुत तकलीफ होती है महिला होने के नाते इस तरह की घटनाओं से मैं खुद को बहुत आहत महसूस करती हूं और मैं महिलाओं से कहना चाहूंगी कि अगर उनके साथ कुछ ऐसा हो रहा है अवश्य पुलिस की मदद लें  या अगर मैं सीधे पुलिस के पास नहीं जा सकती तो मुझे विश्वास में लेकर अपने साथ हुई घटनाओं को पुलिस को बताकर कानून की मदद लें या *अभिव्यक्ति* एप की सहायता ले  । आज शासन , कानून और पुलिस महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों को देखकर वाकई चिंतित हैं यही कारण है की महिलाओं के प्रति कानून व्यवस्था में लगातार सुधार किए जाते रहे हैं और महिलाओं के पक्ष में अनेक कानून बनाए जाते रहे हैं  
इस विषय में कानून और व्यवस्था अपना काम कर रही हैं । महिलाओं और लड़कियों खासकर नाबालिग के साथ हो रहे इस तरह के दूर्व्यवहार और हिंसा को रोकने के लिए परिवार ज्यादा मददगार हो सकता है । इस विषय में विषय-विशेषज्ञों का कहना है आज के समय में परिवार इस तरह की हिंसा को रोकने में सबसे ज्यादा मददगार हो सकता है । स्कूल के साथ मांओ को भी छोटी बच्चियों को  "गुड टच बैड टच" की जानकारी दी जानी चाहिए । उन्हें यह भी बताया जाना चाहिए कि परिवार के सदस्य या स्कूल या बाहर कहीं भी उनके साथ कुछ भी असामान्य हरकत होती हैं तो इस हरकत को अपनी मां को या टीचर्स को जरूर बताएं , खासकर आजकल की मांओं को अपने छोटी बच्चियों किशोर होती बेटियों को लेकर ज्यादा सावधानी और सुरक्षा बरतने की आवश्यकता है । एक सर्वे में यह भी बताया जा रहा है कि छोटी बच्चियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार या दुष्कर्म जैसी घटनाओं  में 60 प्रतिशत हाथ  परिवार के किसी सदस्य का हाथ होता है इसलिए  बहुत आवश्यक है कि मां अपनी बेटियों को समय-समय पर  इस तरह की बातों की जानकारी देती रहें और आवश्यकता पड़ने पर कानून की मदद अवश्य लें । युवा होती बेटियों को  विश्वास में लेकर उनके जीवन , मन और उनके फ्रैंड सर्कल में हो रही बातों को जानकर रखकर हम सब  समाज , परिवार और मां अपनी बेटियों को बचा सकते हैं ।
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