WEE REPO - ब्रह्माकुमारीज़ मस्तूरी में आध्यात्मिक रहस्यों के साथ छत्तीसगढ़ का प्रथम त्यौहार - हरेली मनाया गया

जीवन में खुशहाली हरियाली जरूरी -: ब्रह्मा कुमारी श्यामा बहन
सेवाकेन्द्र प्रांगण में किया गया वृक्षारोपण

 सोनू टंडन की रिपोर्ट

 मस्तूरी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय भाजपा कार्यालय परिसर में छत्तीसगढ़ का प्रथम त्यौहार हरेली मनाया गया। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष के अमावस्या के दिन मनाये जाने वाले इस त्यौहार के आध्यात्मिक रहस्यों को ब्रह्माकुमारी श्यामा बहन ने स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इस दिन विशेष हमारे कृषक भाई-बहन कृषि के काम में जो औजार उपयोग में लाते हैं, उन औजारों की धुलाई -सफाई करके पूजा करते है, विशेषकर हल की पूजा होती है। कृषि और ऋषि, कृषक भाई- बहन खेती में बहुत मेहनत कर अन्न का उत्पादन करते हैं इसलिए कृषक को अन्नदाता कहा जाता है और वह अन्नदाता हरेली के दिन अपने औजारों की पूजा करते हैं।
इस दिन गांव में घरों के दरवाजों पर नीम की पत्तियां लगाई जाती है इसका कारण है कि हम नकारात्मक बातों से बचकर रहें और इस दिन विशेष घरों में पालतू मवेशी को जड़ी-बूटी वाली दवाई खिलाई जाती है, जिससे मौसम परिवर्तन में होने वाली बीमारी से उनकी रक्षा हो सके। इस दिन झूला भी झूला जाता है और गांव में बच्चे गेड़ी का खेल खेलते हैं।
इस अवसर पर ब्रम्हाकुमारीज प्रांगण मे हरियाली व पर्यावरण की सुरक्षा के लिए  आर.के. त्रिपाठी  जी, गीता त्रिपाठी जी व सेवा केंद्र के भाई -बहनों द्वारा वृक्षारोपण किया गया।

 श्यामा बहन ने बतलाया कि हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। हरियाली से ही जीवन में खुशहाली आती है। इस पर्व में विशेष शिवजी की पूजा की जाती है।
इस त्योहार का सेवा केंद्र पर आने वाले भाई बहनों ने आध्यात्मिक रहस्य जाना और पूरे श्रद्धा भाव से जो भी  आवश्यक काम में आने वाले औजार हैं उन सभी की पूजा की और सभी को प्रसाद वितरण किया गया।
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