भादों में लगी सावन की झड़ी, बारिश का सुपर संडे

भादों में लगी सावन की झड़ी, बारिश का सुपर संडे


शनिवार रात से हो रही बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त : 20 घंटे में डेढ़ इंच बारिश, इस साल का आंकड़ा 29 इंच के हुआ पार

सिहोरा 

शनिवार देर रात से हो रही लगातार बारिश के चलते सिहोरा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। भादो के महीने में बारिश की सावन की झड़ी लग गई है। लगातार हो रही बारिश के चलते नदी और नाले उफान पर हैं। जिसको लेकर स्थानीय प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। पिछले 20 घंटे (शनिवार सुबह 8 से रविवार शाम 6 बजे तक) की बात की जाए तो सिहोरा में करीब डेढ़ इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई है। अभी भी बारिश का क्रम रुक-रुक कर तेज होता जा रहा है। 

शनिवार देर रात से शुरू हुआ बारिश का क्रम रविवार को पूरे दिन चलता रहा। सिहोरा नगर की बात की जाए तो बारिश के चलते लोग अपने घरों में ही जमे रहे। मझौली बाईपास मिस्पा मिशन रोड पर सड़क पानी में डूब गई जिसके चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई जगह नदी और नाले लगातार हो रही बारिश के चलते उफान पर हैं हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क सिहोरा और मझोली से नहीं टूटा है। 



20 घंटे में 38 मिलीमीटर दर्ज हुई बारिश

सिहोरा स्थित मौसम कार्यालय से हासिल जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह 8 बजे से लेकर रविवार शाम 6 बजे तक लगभग 38 मिलीमीटर (डेढ़ इंच) बारिश सिहोरा में दर्ज की गई। इस वर्ष अभी तक बारिश का आंकड़ा 709.6 मिली मीटर (29 इंच) को पार कर गया है। वहीं आज के दिन तक पिछले वर्ष की बात की जाए तो सिहोरा में 582.6 मिलीमीटर (23 इंच) बारिश दर्ज की गई थी इस हिसाब से देखा जाए तो अभी भी बारिश का आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।

औसत बारिश से अभी भी बहुत पीछे

रुक रुक कर लगातार हो रही बारिश की बात की जाए तो यदि इसी तरह अगस्त माह में बारिश का क्रम जारी रहा तो औसत बारिश का कोटा पूरा हो सकता है। सिहोरा में औसत बारिश का आंकड़ा वैसे भी 42 इंच है। जो अभी तक के आंकड़े के हिसाब से लगभग 12 इंच कम है। 




बारिश से किसानों के खिले चेहरे, धान को मिला अमृत


पिछले दो दिनों से हो रही बारिश के चलते किसानों के चेहरे एक बार फिर खिलखिला उठे हैं। धान की फसल के लिए पिछले दो दिनों से गिर रहा पानी अमृत से कम नहीं है। वैसे भी इस समय धान की फसल के लिए पानी की सबसे ज्यादा जरूरत किसानों को थी। इस पानी के कारण जहां धान की फसल को नया जीवन मिल गया है वहीं किसानों ने भी काफी राहत की सांस ली है।
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