विधि - विधान से पूजा अर्चना कर की अखंड सौभाग्य की कामना


हरतालिका तीज व्रत माता पार्वती के द्वारा भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के उत्सव के रूप में मनाया जाता है । ये बातें कथा वाचक पं. मयंक त्रिपाठी ने रात्रि में तीज व्रत पूजा के दौरान कही । उन्होंने कहा कि पौराणिक कथा के अनुसार पार्वती जी ने शंकर जी को पति के रूप में हर जन्म में पाने के लिए कठोर तप किया था । वैसा ही सौभाग्य पाने के लिए सुहागिन स्त्रियां इस व्रत को करती हैं । इस कथा के अनुसार जब देवी सती ने पार्वती के रूप में पर्वत राज हिमालय के घर जन्म लिया तो वे उनके मन में सदैव शंकर जी को ही वर बनाने की इच्छा थी । उन्होंने सखियों की सलाह मान कर देवी पार्वती उनके साथ घोर वन में चली गई । वहां पहुंच कर गंगा नदी के तट पर उन्होंने कठोर तपस्या की । वह दिन हस्त नक्षत्र में भाद्रपद शुक्ल तृतीया का था । इस घोर तप से प्रसन्न होकर शंकर जी प्रकट हुए और पार्वती जी की इच्छा पूर्ण होने का वरदान दिया । तभी से श्रेष्ठ वर और अखंड सौभाग्य के लिए कुंवारी युवतियां और सौभाग्यवती स्त्रियां दोनों हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं और शिव व पार्वती की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं । तीज पर्व पर महिलाओं ने मंगलवार को दिन निर्जला व्रत रखे और शाम होते ही पति के अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर सोलह शृंगार कर एक जगह एकत्रित हुई और भगवान शिव पार्वती की पूजा की । जहां कथा वाचक ने कथा श्रवण कराते हुए पूजा अर्चना करवाया । महिलाएं भी अपने मेहंदी रचे हाथों से मेंहदी , कुमकुम व चूड़ी सहित सुहाग की सामाग्री के साथ नई साड़ी अर्पित कर पूजा अर्चना किया । साथ ही देर रात्रि तक भजन कीर्तन भी किए ।

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