जिम्मेदारों की लापरवाही से सड़ गई हजारों क्विंटल धान, प्रशासन बेसुध


जिम्मेदारों की लापरवाही से सड़ गई हजारों क्विंटल धान, प्रशासन बेसुध


वेयरहाउस लॉजिस्टिक कार्पोरेशन के बंदरकोला ओपन कैप का मामला : मैनेजर और निजी कंपनी एक दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी

सिहोरा 

एक ओर जहां किसान की धान में थोड़ी सी भी कमी होती है तो सरकार उस किसान की धान नही खरीदती, वही दूसरी ओर खरीदी हुई हजारों क्विंटल धान खराब हो जाती है और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगती। खरीदी के समय अधिकारियों के दौरे तो लगते रहते हैं पर बारिश के समय संग्रहित धान की स्थिति देखने का समय प्रशासन को नही है। 
पूरा मामला सिहोरा के बंदरकोला ओपन कैंप का है, जहां हजारों क्विंटल धान खराब हो चुकी है और हजारों क्विंटल खुले में खराब होने का इंतजार कर रही है 2020-21 की धान का ठेका हो चुका है, जिसे ट्रांसपोर्टर द्वारा परिवहन किया जा रहा है। 


जानकारी के अनुसार रखरखाव का ठेका गो ग्रीन नाम की कम्पनी को दिया गया है। पर गो ग्रीन कम्पनी के मैनेजर का कहना है की हमारी पूरी धान कवर्ड है जो धान खुले में है वह शासन की देखरेख में है। 

खरीदी के बाद नही जाते अधिकारी 

खरीदी केंद्र में खरीदी के समय तो बड़े बड़े अधिकारी, नेता आए दिन खरीदी केंद्र के चक्कर लगाते रहते हैं, पर बाद में कोई अधिकारी नही जाता न ही केंद्र की सुध लेता जिससे सरकार को लाखों का करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है।


सड़ी धान को दूसरी बोरियों में भर कर भेज देते हैं, बदबू से पास खड़े होना मुस्किल 

खरीदी केंद्र में सड़ी हुई धान को दूसरी बोरी में भर रहे मजदूर ने बताया की सड़ी धान को दूसरी बोरी में भर कर भेज देते हैं। सभी ढेरों में मजदूर लगे हुए हैं जो सड़ी धान को भरने का कार्य कर रहे हैं। सड़ी हुई धान जहां खड़े होना मुश्किल है वहां मजदूर कार्य कर रहे हैं। 

कवर्ड धान के नीचे का हिस्सा अंकुरित होकर सड़ रहा

जो धान खुले में है वह तो खराब हो ही रही है साथ ही केंद्र में जो पनी से धान कवर की गई है उसके नीचे का हिस्सा भी अंकुरित होकर सड़ रहा है। 

अधिकारी और ठेका कर्मी लगा रहे एक दूसरे पर आरोप

इस संबंध में जब कैंप प्रभारी से बात की गई तो उनका कहना है की मुझे दो केंद्रों का प्रभार है तिलसानी और बंदरकोला जो धान खुले में पड़ी है वह 2020 21 की है जिसका परिवहन हो रहा है उसमे कुछ धान गो ग्रीन कम्पनी के रखरखाव में है। वही दूसरी ओर जब गो ग्रीन कम्पनी के मैनेजर से बात हुई तो उनका कहना है की हमारी पूरी धान कवर्ड है जो धान खुले में रखी है वह सरकारी है।

इनका कहना

ओपन कैप में रखी धान कैसे खराब हो गई इसकी जानकारी मुझे आप के माध्यम से लगी है। मौके पर जाकर सारी व्यवस्थाओं की जानकारी ली जाएगी और आखिर किन कारणों से ध्यान बर्बाद हुई इसका जवाब जिम्मेदारों से लिया जाएगा।

आशीष पांडे,  एसडीएम सिहोरा
Previous Post Next Post