सचिन पायलट से ऐसी भी क्या दुश्मनी की हाईकमान से टकरा गए अशोक गहलोत


नईदिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष पद के निर्वाचन के पहले ही  राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलने की कवायद गांधी परिवार के लिए गले की हड्डी बन गई है. अशोक गहलोत भले ही सामने नहीं आए, लेकिन करीबी विधायकों ने सचिन पायलट के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है सीएम के चयन के लिए कांग्रेस की ओर से बुलाई गई विधायक दल की बैठक नहीं हो सकी और आलाकमान का संदेश लेकर जयपुर गए पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे-अजय माकन खाली हाथ दिल्ली लौट आए. ये सिर्फ पायलट नहीं बल्कि सीधे-सीधे कांग्रेस हाईकमान के फैसले का विरोध है. सवाल है कि आखिर पायलट से गहलोत की ऐसी क्या खुन्नस है कि उन्हें रोकने के लिए अशोक गहलोत गांधी परिवार के खिलाफ खड़े हो गए?

राजस्थान की सियासत के जादूगर माने जाने वाले अशोक गहलोत ने अपने 40 साल के सियासी सफर में एक से एक बड़े नेताओं को मात देकर सियासी वर्चस्व बरकरार रखा है. उनके सामने किसी नेता ने अगर वाकई दमदार चुनौती खड़ी की है तो उस शख्स का नाम सचिन पायलट ही है. गहलोत भले ही 2018 में राजस्थान के मुख्यमंत्री बन गए, लेकिन पिछले पौने चार साल पायलट के चलते चैन की नींद नहीं सो सके. अपनी सरकार बचाने के लिए दो बार उन्हें अपने विधायकों को महीने भर तक पहरे में रखना पड़ा. यही वजह है कि गहलोत को पायलट अब बिल्कुल स्वीकार नहीं हैं.
कांग्रेस आलाकमान ने भले ही सचिन पायलट को सीएम बनाने का फैसला कर लिया हो, लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत अपने सियासी उत्तराधिकारी के तौर पर पायलट को छोड़कर किसी भी नेता को कुर्सी सौंपने के लिए तैयार हैं. गहलोत खेमे के तमाम विधायकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सचिन पायलट के बजाय किसी को भी कांग्रेस हाईकमान मुख्यमंत्री बनाने का फैसला कर ले, उन्हें स्वीकार है.
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