दिव्यांग बच्चे परिजनों के साथ तलाशते रहे बैठने की जगह, उमस भरी गर्मी में पानी तक नहीं हुआ नसीब

दिव्यांग बच्चे परिजनों के साथ तलाशते रहे बैठने की जगह, उमस भरी गर्मी में पानी तक नहीं हुआ नसीब


सिहोरा में चिकित्सीय मूल्यांकन शिविर में जमकर दिख अव्यवस्था :  परेशान होते रहे परिजन, कई बिना मूल्यांकन के लौटे


सिहोरा

विकासखंड सिहोरा में शिक्षा विभाग के जवाबदार भले ही अपनी उत्कृष्ट कार्यों के लिए खुद की पीठ थपथपाते व अपनी झूठी सफलता का ढिंढोरा पीटते रहते हो, लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल उलट है। इसका ज्वलंत उदाहरण अधिकारियों के निकम्मेपन गैर जिम्मेदाराना व अव्यवस्थाओं की बानगी विकासखंड स्तरीय दिव्यांग बच्चों के चिकित्सीय मूल्यांकन शिविर में देखने को मिली।


कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के विद्यालयों में अध्ययनरत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की औपचारिक पहचान हेतु जनपद शिक्षा केन्द्र सिहोरा द्वारा शासकीय माध्यमिक शाला (हिंदी स्कूल) में 10.30 से 5 बजे बजे तक मूल्यांकन शिविर का आयोजन किया गया था। मूल्यांकन शिविर में विकासखंड सिहोरा की लगभग 25 से 20 किलोमीटर दूर दिव्यांग बच्चों को प्रातः 10:30 बुलाया गया था। जिसमें अभिभावक माता पिता आपने दिव्यांग बच्चों को लेकर समय पर पहुच गए।  जवाबदार अधिकारी व डॉक्टर मूल्यांकन शिविर से नदारद थे। 



दिव्यांग बच्चे बैठने के लिए तलाशते रहे जगह, पीने के लिए नसीब नहीं हुआ पानी

शिविर में अव्यवस्थाओं का आलम था कि दिव्यांग बच्चे विशेष रूप से अस्थि विकलांग बच्चे जो चलने फिरने में असमर्थ थे, वैशाखी पर चलकर दूरस्थ ग्रामों से आए थे और अपनी बैठने का स्थान शिविर में तलाशते नजर आए। उन्हें यहां पर न तो पानी नसीब हुआ न ही छाया। धूप में पसीने से तरबतर परेशान होते देख बहुत से अभिभावक अपने बच्चों को बेरिंग वापस ले गए। उन्होंने कहा कि तीन घंटे से डॉक्टरों का अता पता नहीं। हमारी कोई खोज खबर लेने वाला भी नहीं है, जब डॉक्टर ही नहीं आए तो हमको यहां बुलाया ही क्यों गया था।


अस्थि विभाग के डॉक्टर लगभग तीन मूल्यांकन शिविर में पहुंचे

मूल्यांकन शिविर में अस्थि विभाग के चिकित्सक 3:00 बजे के लगभग पहुंचे थे।शिविर में जिला चिकित्सालय से मेडिकल बोर्ड टीम द्वारा विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओ से प्रभावित बच्चों का परीक्षण कर निशक्तता प्रमाण पत्र बनाए जाएंगे,  साथ ही भारतीय कृतिम उपकरण संस्थान जबलपुर एलिम्को के विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण कर आवश्यकतानुसार उपकरण हेतु चिन्हांकन किया जाना था।  विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का प्रमाण पत्र नहीं बना है या उसका नवीनीकरण, सहायक उपकरण की आवश्यकता आदि के लिए 237 दिव्यांग बच्चों को बुलाया गया था। 


क्या कहते हैं जिम्मेदार

दिव्यांग बच्चों के मूल्यांकन शिविर में कुछ व्यवस्थाएं जरूर रहीं, जिन्हें तत्काल दूर कर लिया गया। शिविर में जितने भी देखता हूं बच्चों को बुलाया गया था उनका चिकित्सकीय मूल्यांकन विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मौके पर किया।


पीएल रैदास, बीआरसी सिहोरा
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