दीपों से उतारी संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की महाआरती

दीपों से उतारी संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की महाआरती


शरद पूर्णिमा महा महोत्सव पर्व :  महाराज श्री का 76वां अवतरण दिवस,  नगर गौरव निर्यापक 108 प्रसाद सागर महाराज का 25वां दीक्षा दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया

सकल जैन समाज सिहोरा का जैन मंदिर झंडा बाजार में आयोजन

सिहोरा

शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर सकल जैन समाज सिहोरा द्वारा संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का 76वां अवतरण दिवस, नगर गौरव निर्यापक 108 श्री प्रसाद सागर महाराज का 25वां  दीक्षा  दिवस  मनाया गया।  गरबा के माध्यम से हर्ष और उल्लास के साथ शरद पूर्णिमा महोत्सव  आयोजन हुआ। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर झंडा बाजार में चंद्रमा की शीतल किरणों के बीच शरद पूर्णिमा महोत्सव महोत्सव पर्व का आयोजन किया गया। शरद महोत्सव का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के तैल चित्र के चमक मुख्य अतिथि नगर पालिका सिहोरा अध्यक्ष संध्या दिलीप, विशिष्ट अतिथि जनपद पंचायत सिहोरा अध्यक्ष रश्मि मनेंद्र अग्निहोत्री, भाजपा जिला उपाध्यक्ष पुष्पराज सिंह बघेल, डॉ आर्यन तिवारी अंजना सराफ, नगर पालिका उपाध्यक्ष शारदा तिवारी, पार्षद रंजना सुशील दुबे ने दीप प्रज्वलन कर शरद पूर्णिमा महा महोत्सव पर्व का शुभारंभ किया।



सांस्कृतिक कार्यक्रम और गरबा की शानदार प्रस्तुति

शरद पूर्णिमा महा महोत्सव पर्व के आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ महिलाओं द्वारा किए सामूहिक गरबे की शानदार प्रस्तुति ने आयोजन में शामिल लोगों को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया। जैन समाज के बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। सकल जैन समाज सिहोरा के इस आयोजन में अध्यक्ष मुलायम चंद जैन, संजय जैन, विमल जैन, आनंद जैन, अरुण जैन, जितेंद्र जैन, सन्मति जैन, अरुण सिंघई, सत्येंद्र जैन, डिंपी जैन, अनिल जैन सतीश जैन, कमलेश जैन, एमसी जैन, निर्मल चंद जैन, जवाहर जैन के साथ सिहोरा और खितौला के जैन धर्मावलंबी बड़ी संख्या में शामिल थे।


                      

प्रख्यात कवयित्री 'मणिका' के शानदार काव्य पाठ में बांधा समा

शरद पूर्णिमा महोत्सव पर्व पर आयोजित कवि सम्मेलन में प्रख्यात कवयित्री और सिहोरा नगर की बेटी मणिका दुबे के काव्य पाठ में कार्यक्रम में समा बांध दिया। एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनकर कार्यक्रम में उपस्थित दो तालियां बजाने पर विवश हो गए। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, मां की ममता सहित अन्य रचनाओं के माध्यम से सभी को भावविभोर कर दिया।
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