खाद लेने पहुंचे किसानों के बीच मारपीट, पुलिस के साथ जमकर हुई झीना-झपटी सिहोरा के विपणन संघ गोदाम का मामला

खाद लेने पहुंचे किसानों के बीच मारपीट, पुलिस के साथ जमकर हुई झीना-झपटी


सिहोरा के विपणन संघ गोदाम का मामला :  रबी सीजन में डीएपी और यूरिया के लिए मची मारामारी प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं था मौके पर

सिहोरा

सरकार और कृषि विभाग के अधिकारी डीएपी-यूरिया की भरपूर उपलब्धता की बात कह रही है वहीं दूसरी तरफ रबी सीजन में खाद की एक-एक बोरी के लिए किसान हालाकान और परेशान है। विपणन संघ सिहोरा के गोदाम में खाद लेने पहुंचे किसानों के बीच जमकर मारपीट हुई। किसानों को संभालने पहुंचे पुलिसकर्मियों के साथ भी जमकर झूमा-झटकी हो गई। हालात तनावपूर्ण और खराब हो गए। इतना सब कुछ होने के बावजूद प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं था। 



ये है मामला

दरअसल विपणन संघ सिहोरा के गोदाम में डीएपी और यूरिया का रैक शुक्रवार को पहुंचा। डीएपी और यूरिया के लिए करीब पांच से छह सौ किसानों ने अपने नाम पहले से ही गोदाम में खाद लेने के लिए लिखवा दिए थे। किसानों की लंबी लबी लाइन डीएपी और यूरिया के लिए लगी थी इस बीच लाइन में पहले लगने को लेकर कुछ किसानों के बीच कहासुनी हुई और देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि किसानों के बीच जमकर हाथापाई होने लगी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने किसानों अलग करने की कोशिश की तो उनके साथ भी जमकर झूमा-झटकी हो गई। 


लगातार बिगड़ रहे हालात, पुलिस और प्रशासन नाकाम

विपणन संघ के गोदाम से नगद में किसानों को यूरिया और डीएपी का वितरण होता है। लगातार हो रही खाद की कमी के कारण किसान परेशान है। एक या दो ट्रक यूरिया डीएपी पहुंचते ही खाद के लिए मारामारी शुरू हो जाती है। लगातार हालात बिगड़ते हैं पुलिस और प्रशासन जैसे संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। पहले भी इस बात का आरोप लगा चुके हैं कि इसके पहले जब भी विपणन संघ के गोदाम में डीएपी और यूरिया का रेट पहुंचा यहां के कर्मचारियों ने व्यापारियों को मोटी रकम लेकर डीएपी और यूरिया बेच दिया। जिसके कारण यह स्थिति बन रही है। 




इनका कहना

प्रत्येक उत्पादन में एक माह पहले शासन की तैयारी शुरू होती है । संभाग स्तर , जिला स्तर पर बैठक कर खाद और बीज की जानकारी राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी भेजते हैं, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की लापरवाही है कि रासायनिक खाद डीएपी और यूरिया की उपलब्धता जानबूझकर कम कर दी जाती है। इसी के चलते ऐसी स्थिति बन रही है।

रमेश पटेल, जिला अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन (टिकैत)
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